रमेश (काल्पनिक नाम), बेंगलुरु के विजयनगर का रहने वाला एक ऑटो ड्राइवर था. दो साल से उसके पास ₹2000 के कुछ पुराने नोट पड़े थे. नोटबंदी के बाद भी वह सोचता रहा कि “कभी काम आ जाएंगे”. फिर एक दिन उसे मंदिर के बाहर एक आदमी मिला जिसने कहा – “भैया, अगर आप ये ₹2000 वाले नोट पूजा में देंगे तो पैसा सौ गुना बढ़ जाएगा… ऐसे बरसेगा जैसे आसमान से पैसे की बारिश हो.”
रमेश पहले हंसा, लेकिन उस आदमी की बातों में ऐसी मिठास थी कि वह फंस गया. उसने कहा, “बस इतना करना है नोट M, N, O, P या G सीरीज के होने चाहिए, तब ही पूजा का असर होता है.” रमेश ने अपने ₹2,000 के 15 नोट दिए और अगले दिन पूजा में आने का वादा किया.
दो दिन बाद रमेश पहुंचा तो वहां धूप-दीप जल रहे थे, लेकिन ‘पंडित’ और उसके साथी कहीं नहीं थे. तभी उसे एहसास हुआ वह ठग लिया गया है. डर के मारे उसने कुछ नहीं कहा, पर मन में जलन थी कि कैसे अपने मेहनत के पैसे गंवा दिए.
इसी बीच RBI को पता चला कि कुछ ₹2000 के नोट जमा करते वक्त उनके सीरियल नंबर बदले गए हैं. शिकायत दर्ज हुई और हला्सूरू गेट पुलिस ने जांच शुरू की. 24 अक्टूबर को पहला आरोपी पकड़ा गया वही जो रमेश जैसे लोगों से नोट लेता था. एक के बाद एक गिरफ्तारी हुई क्यूब्बनपेट, मैसूर बैंक सर्किल, मजेस्टिक बस स्टैंड, फिर आंध्र प्रदेश और आखिर में यशवंतपुर.
जब पुलिस ने गिरोह के ठिकाने से ₹18 लाख के पुराने ₹2000 के नोट और नकली नंबर बदलने के टूल बरामद किए, तो रमेश जैसे सैकड़ों लोगों के जले हुए दिल को कुछ राहत मिली.
आज रमेश फिर ऑटो चला रहा है, लेकिन हर दिन सवारी को उतरते वक्त कहता है
भाई, कोई बोले पैसे की बारिश कराऊंगा, तो पहले पुलिस में शिकायत कर देना. वरना बरसेगा सिर्फ धोखा.”
