बलिया के रघुनाथपुर गांव में रहने वाले अनूप कुमार सिंह ने बड़ी उम्मीदों के साथ उत्कर्ष बैंक में एक करेंट खाता खुलवाया. सोच रहे थे – “अब डिजिटल इंडिया है भई, थोड़ा ऑनलाइन लेन-देन कर लेंगे, थोड़ा रौब भी बढ़ेगा!”
लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनके बैंक खाते की किस्मत Netflix की वेब सीरीज़ बन जाएगी.
खेल में एंट्री होती है पंकज सिंह की…
पंकज सिंह, जो अनूप के दोस्त का ‘दोस्त’ था, धीरे-धीरे मीठी-मीठी बातों में अनूप को ऐसा फंसाता है कि बैंक खाता खुलवाने के सारे कागज, सिम कार्ड वगैरह लेकर निकल लेता है.
“भैया भरोसा रखिए, मैं बस अपने बिजनेस में इस्तेमाल करूंगा.”
अनूप भी सोचते हैं, “चलो मदद कर देते हैं. बंदा जान-पहचान का है.”
फिर शुरू होता है पैसों का ‘खेला’…
कुछ महीनों बाद अनूप को बैंक से एक SMS आता है —
“आपके खाते से ₹87,00,000 का लेनदेन हुआ है.”
अनूप हड़बड़ा गए, माथा पकड़ लिया.
“87 लाख?! मैं तो व्हाट्सएप पर ₹87 का रिचार्ज भी सोच-समझकर करता हूं!”
अब आती है e-Zero FIR की बारी!
पहले तो अनूप सोच ही नहीं पाए कि क्या करें. लेकिन तभी किसी ने बताया कि अब तो “e-Zero FIR” ऑनलाइन दर्ज की जा सकती है —
न थाने की लाइन, न चाय पिलाने का खर्च!
अनूप ने झटपट cybercrime.gov.in पर जाकर
शिकायत दर्ज की
खाता नंबर और डिटेल दी
और FIR नंबर भी तुरंत मिल गया!
साइबर थाना पुलिस की एंट्री-अब पुलिस भी कोई पीछे हटने वाली नहीं थी!SP ओमवीर सिंह और ASP कृपाशंकर के नेतृत्व में साइबर टीम ने पंकज सिंह को धर दबोचा.जांच में पता चला, भाई साहब तो बलिया से लेकर छत्तीसगढ़ तक फर्जी खातों से लेन-देन कर रहे थे.
सीख क्या मिली?
कभी भी किसी को अपने बैंक खाते के दस्तावेज न दें
शक हो तो तुरंत e-Zero FIR दर्ज करें
और हां, ज़रूरत पड़े तो 1930 पर कॉल करें!
अब अनूप चैन की नींद सोते हैं और गांव वालों को बताते हैं –
“भइया, e-Zero FIR न होता, त हम तो रोड पर आ गए रहते!”
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