कहानी: सासंद साबह की पत्नी प्रीति डिजिटल अरेस्ट से बच गई…लेकिन कमाल तो पुलिस ने किया
बेंगलुरु की सुबह थी. प्रीति, कर्नाटक के सांसद डॉ. के. सुधाकर की पत्नी, अपने घर में बैठी थीं. अचानक फोन बजा मैं मुंबई पुलिस साइबर क्राइम सेल से बोल रहा हूं… आपके डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल आतंकियों ने किया है. एक व्यक्ति गिरफ्तार हो चुका है, अगली बारी आपकी है.”
प्रीति घबरा गईं. कॉलर ने उन्हें एक तस्वीर भेजी – किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी की फोटो. विश्वास जमाने के लिए यही काफी था.
इसके बाद उन्हें व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर जोड़ा गया. सामने वाला बोला अब आप डिजिटल अरेस्ट में हैं. हम वर्चुअल जांच कर रहे हैं. आपको सहयोग करना होगा वरना जेल जाना पड़ेगा.
डर के माहौल में प्रीति से उनके पर्सनल डिटेल मांगे गए और फिर कहा गया कि उन्हें ₹14 लाख एक खाते में ट्रांसफर करने होंगे. प्रीति ने बैंक जाकर पैसे भेज दिए.
परिवार को शक हुआ
प्रीति बैंक में थीं, लेकिन अपने घरवालों से कुछ नहीं कह रही थीं. जब परिवार ने फोन किया तो उन्होंने अपनी लोकेशन तक बताने से मना कर दिया.यह देखकर परिवार को शक हुआ और उन्होंने तुरंत पुलिस को खबर दी.
पुलिस की फुर्ती
पुलिस ने प्रीति से बात की और पूरा सच सामने आया.तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की गई.बैंक को अलर्ट किया गया और पैसे जिस खाते में गए थे, उसे फ्रीज़ कर दिया गया.3 सितंबर को कोर्ट ने आदेश दिया और पूरा पैसा प्रीति के अकाउंट में वापस आ गया.
सबक
पुलिस अधिकारी ने साफ कहा-“डिजिटल अरेस्ट या वर्चुअल जांच जैसी कोई चीज़ असल पुलिस नहीं करती.”ऐसे कॉल आते ही तुरंत फोन काट दें और 1930 पर रिपोर्ट करें.
