Friday, March 13, 2026
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मां की गोद में सिर रखकर रोया राहुल – बोला, ‘मां, नौकरी नहीं मिली… बस बच गया ज़िंदा!’

by Anuradha Pandey

नोएडा के एक छोटे से घर में आज खुशियों और दर्द दोनों का माहौल है. दरवाज़े पर भीड़ है, और बीच में बैठा है 27 साल का राहुल शर्मा वो लड़का जो कुछ महीने पहले “थाईलैंड में आईटी जॉब” के सपने लेकर निकला था, और अब म्यांमार के साइबर फ्रॉड हब से जिंदा लौट आया है.

मां ने उसे सीने से लगाते हुए पूछा, “बेटा, वहां क्या हुआ?” राहुल बस इतना ही कह पाया

“मां, नौकरी नहीं मिली… बस बच गया ज़िंदा.”

कैसे फंसा राहुल-राहुल को लिंक्डइन पर एक ऑफर मिला था IT सपोर्ट जॉब इन थाईलैंड, ₹1.5 लाख सैलरी, फ्री रहना और खाना.घर की हालत खराब थी, तो राहुल ने बिना ज्यादा जांचे ऑफर स्वीकार कर लिया. कुछ लोगों ने दिल्ली एयरपोर्ट पर उसका पासपोर्ट और टिकट संभाल लिया और कहा “बस दो दिन ट्रेनिंग के लिए म्यांमार जाना होगा.

पर ये ट्रेनिंग नहीं, ट्रैप था.
म्यांमार की सीमा पार करते ही राहुल और बाकी युवाओं के फोन और पासपोर्ट छीन लिए गए. उन्हें KK Park नाम के साइबर फ्रॉड कैंप में भेज दिया गया, जहां दिन-रात उनसे फर्जी लोन ऐप्स और ऑनलाइन स्कैम करवाया जाता था.जो विरोध करता, उसे मारते थे. हमें कहा जाता था कि लोगों को कॉल करो, उन्हें लिंक भेजो, और पैसा निकलवाओ. मैं हर दिन डर के साथ जी रहा था, राहुल की आंखें भर आईं.

म्यांमार में सेना की कार्रवाई और भागने का मौका
म्यांमार की सेना ने हाल ही में KK Park पर बड़ा ऑपरेशन चलाया, जिसमें कई विदेशी नागरिकों को छुड़ाया गया. मौके का फायदा उठाकर राहुल जैसे कई भारतीय भागकर थाईलैंड के Mae Sot इलाके में पहुंचे.थाई सरकार ने इन्हें हिरासत में लिया और अब भारत सरकार इन 500 भारतीयों को वापस ला रही है.विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बताया कि भारतीय दूतावास थाई अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि सभी नागरिकों को कानूनी औपचारिकताओं के बाद सुरक्षित भारत लाया जा सके.हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि किसी भी भारतीय को इन साइबर स्कैम हब्स में फिर न फंसना पड़े.

फर्जी नौकरी का जाल और भारत की कार्रवाई
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी 27 अक्टूबर को East Asia Summit में इस मुद्दे पर चिंता जताई थी. उन्होंने कहा था कि “साइबर फ्रॉड हब्स में कई भारतीय फंसे हैं, जिन्हें जल्द से जल्द बाहर निकालना जरूरी है.भारत सरकार ने इससे पहले मार्च 2025 में भी एक एयरलिफ्ट ऑपरेशन के तहत 283 नागरिकों को वापस लाया था, जिन्हें म्यांमार और कंबोडिया में फर्जी आईटी जॉब्स के बहाने फंसाया गया था.अब तक कुल 1,600 से ज्यादा भारतीयों की वापसी हो चुकी है.

राहुल की कहानी से सीख
राहुल अब कहता है, अगर कोई आपको विदेश में बड़ी सैलरी का ऑफर दे, तो पहले भारतीय दूतावास या विदेश मंत्रालय से कंपनी की जांच जरूर करा लें.वो चाहता है कि कोई और भारतीय उसकी तरह धोखा न खाए.“वो कहते थे – बस कोड भेजो, लिंक शेयर करो, पैसे आएंगे… पर मुझे समझ आया – वहां पैसे नहीं, जिंदगी दांव पर थी.

जरूरी नंबर और सलाह
शिकायत के लिए: www.cybercrime.gov.in
नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन: 1930
म्यांमार में भारतीय दूतावास: +95-95419602

राहुल अब मां की गोद में सिर रखकर बैठा है.
घर के कोने में लटकती भगवान की तस्वीर के सामने उसने हाथ जोड़ दिए -भगवान, बस अब दोबारा कभी सपना नहीं… धोखा नहीं.उसकी आंखों से बहते आंसू सिर्फ एक राहुल के नहीं, उन सैकड़ों भारतीय युवाओं के हैं जो नौकरी के सपनों में जाल में फंस गए पर किस्मत से लौट आए ज़िंदा.

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