गाज़ियाबाद की 75 साल की शांति देवी अपनी हर महीने की पेंशन पर ही घर चलाती हैं. नवंबर आया तो बेटा बोला,मां, इस बार जीवन प्रमाण पत्र ऑनलाइन जमा कर दो, बैंक जाने की जरूरत नहीं.शांति देवी खुश थीं -अब तो सब आसान हो गया.”
पर उन्हें क्या पता था कि यही सुविधा एक दिन साइबर ठगों का मौका बन जाएगी.
मांजी, मैं सरकार से बोल रहा हूं…”
5 नवंबर की सुबह शांति देवी को फोन आया.सामने से मीठी आवाज़ में किसी ने कहा-“माँजी, आपका जीवन प्रमाण पत्र एक्सपायर हो गया है. सरकार की नई गाइडलाइन है, आज ही अपडेट कराइए.आवाज़ भरोसेमंद लग रही थी.
कॉलर ने कहा,बस अपना आधार नंबर, बैंक डिटेल और जो OTP आएगा, वो बता दीजिए. बाकी हम कर देंगे.”
शांति देवी ने कहा “बेटा, ठीक है और उन्होंने OTP बता दिया. 10 मिनट बाद उनके मोबाइल पर मैसेज आया ₹38,000 आपके अकाउंट से डेबिट हो गए हैं.
अब पछताने से क्या फायदा-डरी-सहमी शांति देवी ने बैंक फोन किया.बैंक ने कहा -ये तो साइबर फ्रॉड है, आपने OTP बताया, इसलिए पैसा ट्रांसफर हो गया.उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि सरकारी नाम लेकर कोई इस तरह धोखा दे सकता है.
उनका पेंशन अकाउंट लगभग खाली हो चुका था.
कहां हुई गलती – और क्या करना चाहिए था
गलती 1: अजनबी कॉल पर भरोसा करना
सरकारी अधिकारी कभी फोन करके OTP या अकाउंट डिटेल नहीं मांगते.
क्या करना चाहिए था-कॉल आने पर नंबर नोट करके बैंक या पेंशन विभाग के असली नंबर पर खुद फोन करें.
गलती 2: फर्जी वेबसाइट खोलना
कॉलर ने एक लिंक भेजा था jeevanpramaan-update.in
जो दिखने में असली लग रहा था, लेकिन असल में फेक साइट थी.
क्या करना चाहिए था:
सिर्फ असली वेबसाइट https://jeevanpramaan.gov.in
या पोस्ट ऑफिस ऐप से ही काम करें.
गलती 3: दूसरों से फोन या Wi-Fi पर काम कराना
शांति देवी ने पास के मोबाइल शॉप से मदद ली, और वहीं से उनकी जानकारी लीक हो गई.
क्या करना चाहिए था
जीवन प्रमाण पत्र हमेशा अपने मोबाइल या घर के इंटरनेट से ही जमा करें.
अग ठगी हो जाए तो क्या करें
बेटे ने समझदारी दिखाते हुए तुरंत-बैंक को फोन करके अकाउंट फ्रीज कराया.
www.cybercrime.gov.in
पर शिकायत दर्ज की.
और 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर रिपोर्ट किया.
अब शांति देवी दूसरों को समझाती हैं
अब वे हर कॉल पर हँसकर कहती हैं -बेटा, सरकार OTP नहीं मांगती… जो मांगे, वही ठग है.”वे अपनी सोसायटी के बुजुर्ग ग्रुप में जाकर सबको बताती हैं कि “ऑनलाइन सुविधा आसान है, लेकिन ठग उससे भी तेज हैं.
काम खुद करो, किसी एजेंट के भरोसे मत रहो.”
सीधा सबक
किसी कॉल पर OTP या बैंक डिटेल कभी मत बताओ.
हमेशा सरकारी पोर्टल से ही काम करो.
शक हो तो तुरंत बैंक और साइबर पुलिस को बताओ.
शांति देवी की कहानी हर पेंशनर के लिए चेतावनी है —
एक कॉल, एक OTP, और पूरी पेंशन गायब.
अब वक्त है सावधान रहने का, क्योंकि ठग भी “सरकारी एजेंट” बनकर आते हैं.
