नोएडा सेक्टर 104 की रहने वाली अनीता सिन्हा की ज़िंदगी में सब कुछ अच्छा चल रहा था. शादी को दो साल ही हुए थे, नया घर, नई ज़िम्मेदारियाँ और रोज़मर्रा की भागदौड़. लेकिन उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि एक छोटी-सी शॉपिंग उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सबक बन जाएगी.
शॉपिंग और कोरियर की चाल
शादी की तैयारियों के लिए अनीता गुजरात गई थीं. वहाँ उन्होंने शॉपिंग की और दुकानदार ने कहा –
“मैडम, कुछ सामान हम आपको कोरियर से भेज देंगे.”
अनीता को इसमें कुछ भी अजीब नहीं लगा. लेकिन यही से शुरू हुआ फ्रॉड का खेल.
कुछ दिन बाद अनीता को फोन आया –
“आपका कोरियर मुंबई पहुँच गया है. लेकिन इसमें आपत्तिजनक सामान मिला है – ड्रग्स और पासपोर्ट.”
ये सुनकर अनीता के पैरों तले ज़मीन खिसक गई.
पुलिस का नाम लेकर डराना
फोन पर मौजूद ठग ने कहा –हम आपको मुंबई घाटकोपर पुलिस ऑफिस से जोड़ते हैं.फोन दूसरे शख्स को ट्रांसफर कर दिया गया. उस व्यक्ति ने खुद को सीनियर ऑफिसर बताया और आवाज़ में कड़कपन डालते हुए कहा –अनीता जी, आपके नाम पर कई केस दर्ज हैं. आपको अभी तुरंत एफिडेविट बनवाना होगा वरना गिरफ्तारी तय है.और फिर सामने से मांगी गई रकम – ₹84,000.
डर और जल्दबाज़ी
अनीता उस वक्त शादी के कामों और घर की भागदौड़ में उलझी हुई थीं. पत्रकार होते हुए भी वह ठग की चाल समझ न सकीं.डर के मारे उन्होंने आधार, पैन जैसी गोपनीय डिटेल्स भी साझा कर दीं और झटपट बैंक से पैसे ट्रांसफर कर दिए.उस समय उन्हें लगा कि इससे उनका नाम बच जाएगा और मामला शांत हो जाएगा.
शक की घंटी
लेकिन पैसे भेजने के बाद दिमाग शांत हुआ तो उन्हें शक हुआ. “आखिर असली पुलिस एफिडेविट बनवाने के लिए सीधे पैसे क्यों मांगेगी?” उन्होंने हिम्मत जुटाई और सीधे पुलिस थाने पहुँचीं.
पुलिस की एंट्री-
पुलिस ने जांच की तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई –जिस खाते में अनीता ने पैसे ट्रांसफर किए थे, उसमें पहले से ही ₹22 करोड़ रुपये साइबर फ्रॉड से जमा थे.अब मामला और गंभीर हो गया.
लेकिन उम्मीद नहीं छोड़ी…यहीं पर अनीता जी का पत्रकार होना काम आया. अनीता ने केस को RBI Ombudsman तक पहुंचाया.लंबा इंतज़ार, कई कागज़ी कार्यवाही और ढेर सारे डॉक्यूमेंट जमा करने के बाद, आखिरकार RBI ने उनकी मदद की.₹84,000 रुपये वापस उनके खाते में ट्रांसफर कर दिए गए.
सबक और संदेश
अनीता आज भी उस घटना को याद करके कहती हैं –“शादी के कामों में उलझी थी, दिमाग साफ़ नहीं चला और मैं फंस गई. लेकिन अब समझ में आता है कि कोई भी कॉल या मैसेज कितना भी असली लगे, उस पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए. सतर्क रहना ही ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है.”
सीख आपके लिए
किसी भी अनजान कॉल पर डर या धमकी में आकर पैसा न भेजें.पुलिस या सरकारी संस्था कभी भी फोन पर पैसे नहीं मांगती.संदिग्ध कॉल या मैसेज की तुरंत शिकायत करें साइबर हेल्पलाइन 1930 पर.ऑनलाइन शॉपिंग और कूरियर कॉल से जुड़े मामलों में हमेशा दोबारा जांचें.
अनीता सिन्हा की आपबीती हमें यही सिखाती है कि साइबर ठग बहुत चालाक होते हैं, लेकिन हमारी एक गलती उन्हें ताकत देती है.
