गाज़ियाबाद के एक छोटे मोहल्ले में रहने वाला राजू (काल्पिक नाम) अपनी नौकरी से मुश्किल से घर चला पाता था. एक दिन उसे एक कॉल आया –“भाई, अगर अपना बैंक अकाउंट हमें इस्तेमाल करने दोगे तो हर ट्रांजैक्शन पर 25% कमीशन मिलेगा. तुम्हें बस खाते की डिटेल देनी है.”
राजू को लगा – “क्या बुरा है? बैठे-बिठाए पैसा आ जाएगा.” उसने सोचा, “मेरा अकाउंट तो वैसे भी खाली पड़ा रहता है.” और उसने अपनी डिटेल्स उस अजनबी को दे दीं.
शुरुआत में कुछ हज़ार रुपये उसके अकाउंट में आए और फिर जल्दी ही निकल भी गए. राजू को हर बार 20-25% मिल जाता था. वह खुश था कि आसानी से पैसा आ रहा है.
लेकिन कुछ हफ्तों बाद, एक सुबह पुलिस उसके घर आ धमकी.राजू हैरान रह गया जब पुलिस ने बताया कि उसके अकाउंट से लाखों रुपये के साइबर फ्रॉड किए गए हैं. पीड़ित लोग रो-रोकर शिकायत कर रहे थे और सबूत सीधे उसके अकाउंट तक जा रहे थे.
राजू बोला, “मैं तो बस अकाउंट किराए पर दे रहा था, असली अपराधी तो कोई और है.लेकिन पुलिस ने कहा – “कानून के हिसाब से ज़िम्मेदारी तुम्हारी है, क्योंकि अकाउंट तुम्हारे नाम पर है. तुमने अपने अकाउंट का दुरुपयोग होने दिया, अब जेल भी तुम्हें ही जाना होगा.”
असलियत-ये कहानी सिर्फ राजू की नहीं है. गाज़ियाबाद पुलिस ने ऐसे 31 बैंक अकाउंट्स पकड़े हैं जो साइबर अपराधियों को किराए पर दिए गए थे. इन खातों से ₹25 लाख से ज्यादा के लेन-देन हुए. पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है और करीब 1200 से ज्यादा अकाउंट्स पर जांच चल रही है.
सीख-राजू जैसे मासूम लोग लालच में फंसकर अपने अकाउंट अपराधियों को दे देते हैं.
पर सच ये है कि कानून में अपराधी वही माना जाएगा जिसके नाम पर अकाउंट है.थोड़ा सा कमीशन लेकर अकाउंट देना, जिंदगी भर की बदनामी और जेल की सज़ा बन सकता है.
इसलिए, कभी भी अपना अकाउंट किसी अजनबी को न दें.
गाज़ियाबाद की सड़कों पर सबकुछ सामान्य लगता है, लेकिन पुलिस की एक बड़ी जांच ने चौंका दिया है. साइबर क्राइम पुलिस ने खुलासा किया है कि 31 बैंक अकाउंट्स (कोटक महिंद्रा बैंक में) साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल हो रहे थे. इन खातों से ₹25 लाख से ज्यादा के लेन-देन सामने आए हैं. पुलिस ने अभी तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है और कई और की तलाश जारी है.
कैसे चलता था यह खेल
यह सिर्फ 31 अकाउंट्स तक सीमित नहीं है. जांच से पता चला है कि असल में यह “अकाउंट रेंटिंग रैकेट” है.धोखेबाज़ आम लोगों को लालच देते थे – “अपना अकाउंट इस्तेमाल करने दो, तुम्हें 20-30% कमीशन मिलेगा.”
खाते से आने-जाने वाला पैसा असल में साइबर फ्रॉड का होता था.कई बार इन खातों को खोलने के लिए फर्जी दस्तावेज़ तक लगाए जाते थे.
पुलिस का शक है कि बैंक के अंदर के कुछ कर्मचारी भी इस खेल में शामिल थे, वरना इतने अकाउंट्स आसानी से ओपन नहीं हो सकते थे.
कितने बड़े पैमाने पर?
सिर्फ कोटक महिंद्रा बैंक में 300 से ज्यादा अकाउंट्स इसी तरह इस्तेमाल हुए होंगे.
इंडियन बैंक में भी 42 अकाउंट्स संदिग्ध पाए गए हैं.
गाज़ियाबाद ज़िले में ही 1200 से ज्यादा अकाउंट्स का गलत इस्तेमाल होने की आशंका है.
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने अकाउंट होल्डर्स पर धोखाधड़ी और ठगी के केस दर्ज किए हैं.
हापुड़ जिले से एक आरोपी को पकड़ा गया है, जिसने 14 अकाउंट किराए पर दिए थे.
एक और आरोपी पर फंड ट्रांसफर करने का आरोप है.
बैंक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है.
आम आदमी के लिए सबक
पुलिस और बैंक अधिकारियों का साफ संदेश है
अपना बैंक अकाउंट कभी भी किराए पर न दें, चाहे कोई कितना भी कमीशन ऑफर करे.फर्जी दस्तावेज़ों से अकाउंट खोलना अपराध है – इसमें फंसने पर सीधा जेल हो सकता है.अगर कोई आपको कॉल कर के अकाउंट इस्तेमाल करने की बात करे तो तुरंत पुलिस या बैंक को सूचना दें.
ये मामले हमें याद दिलाते हैं कि थोड़े से लालच में अपनी बैंकिंग पहचान बेचना सिर्फ दूसरों को नहीं, खुद को भी मुसीबत में डाल देता है. साइबर अपराधी इन अकाउंट्स का इस्तेमाल पैसा सफेद करने और पुलिस से बचने के लिए करते हैं, लेकिन आख़िरकार पकड़ अकाउंट होल्डर की होती है.
