Friday, March 13, 2026
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1 नवंबर से दिल्ली में साइबर अपराध पर बड़ी पहल- हर थाने में दर्ज होगी E-FIR

by Anuradha Pandey

दिल्ली में साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया अब और आसान हो रही है. 1 नवंबर से 1 लाख रुपये तक के साइबर फ्रॉड मामलों की E-FIR अब किसी भी थाने में दर्ज कराई जा सकेगी. इसके लिए अब साइबर अपराध शाखा (Cyber Crime Branch) के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी. इस कदम से न केवल पीड़ितों को राहत मिलेगी बल्कि पुलिस को भी कार्रवाई में तेजी लाने में मदद मिलेगी. इस नई व्यवस्था की शुरुआत दिल्ली पुलिस कर रही है.

किसी भी थाने में दर्ज होगी साइबर E-FIR
अब दिल्ली का कोई भी नागरिक 1 लाख रुपये तक के ऑनलाइन फ्रॉड या साइबर अपराध की शिकायत किसी भी पुलिस थाने में दर्ज करा सकेगा.पहले ऐसे मामलों में सिर्फ साइबर अपराध शाखा (Cyber Cell) में ही शिकायत ली जाती थी.इस बदलाव के साथ थाने के क्षेत्राधिकार (jurisdiction) की बाध्यता भी खत्म कर दी गई है, यानी अब यह मायने नहीं रखेगा कि अपराध कहां हुआ.

नई व्यवस्था की प्रमुख बातें
-1 नवंबर से लागू होगी नई व्यवस्था.
-अब 1 लाख रुपये तक के साइबर अपराध की E-FIR किसी भी थाने में दर्ज होगी.
-इससे बड़े यानी 1 लाख रुपये से अधिक के मामलों की शिकायत अब भी साइबर अपराध शाखा में ही दर्ज होगी.
-पहले E-FIR की लिमिट 10 लाख रुपये तक थी, जिसे अब घटाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया है ताकि छोटे मामलों में त्वरित कार्रवाई हो सके.
-शिकायत दर्ज कराने के बाद 72 घंटे के अंदर कार्रवाई शुरू की जाएगी.
-शिकायतकर्ता को SMS और ईमेल के ज़रिए हर स्टेप की जानकारी दी जाएगी.
-इसके अलावा 1930 हेल्पलाइन नंबर पर भी E-FIR दर्ज कराई जा सकेगी.

क्यों है यह बदलाव जरूरी
दिल्ली में बीते कुछ सालों में साइबर फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़े हैं. आंकड़ों के मुताबिक
-2023 में 1,347 केस दर्ज हुए, जिनमें 183 करोड़ रुपये का फ्रॉड हुआ.
-2024 में 1,591 केस, नुकसान 817 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
-2025 में (अब तक) 184 केस सामने आए हैं, जिनमें करीब 70 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है.
इन बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने तय किया है कि आम नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने में आसानी दी जाए और कार्रवाई का दायरा स्थानीय थानों तक बढ़ाया जाए.

होगा फायदा
-समय की बचत: अब साइबर सेल तक जाने की जरूरत नहीं.
-जल्दी कार्रवाई: थाने स्तर पर FIR दर्ज होने से शुरुआती जांच तुरंत शुरू हो सकेगी.
-पारदर्शिता बढ़ेगी: शिकायतकर्ता को हर स्टेज की जानकारी दी जाएगी.
-पुलिस पर दबाव घटेगा: साइबर सेल पर काम का बोझ कम होगा और केस तेजी से सुलझ सकेंगे.
-सुरक्षा में सुधार: छोटे मामलों में भी तुरंत ऐक्शन होने से अपराधियों पर अंकुश लगेगा.

दिल्ली पुलिस का यह कदम साइबर अपराध से निपटने की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है.अब साइबर फ्रॉड पीड़ितों को ना थाने बदलने की झंझट, ना साइबर सेल जाने की परेशानी.
1 नवंबर से लागू होने वाली यह सुविधा हर नागरिक के लिए तेज़, पारदर्शी और सुरक्षित व्यवस्था की शुरुआत करेगी.

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