दिल्ली की चिलचिलाती गर्मी में 30 मई की दोपहर कुछ खास थी. प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर में हलचल तेज थी. एक ऐसा मामला सामने आया जिसने पढ़ाई-लिखाई से जुड़े पवित्र संस्थानों को ऑनलाइन जुए की लत में लिपटे एक बड़े घोटाले से जोड़ दिया.
कहानी की शुरुआत – भरोसे का टूटा रिश्ता

देश की राजधानी दिल्ली में 46 शिक्षण और अन्य संस्थानों ने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए अपने पैसे फिक्स्ड डिपोजिट (FD) में लगा रखे थे. दिल्ली यूनिवर्सिटी और SGTB खालसा कॉलेज जैसे नामचीन संस्थान भी इनमें शामिल थे. सोचिए, वो पैसा जो बच्चों की पढ़ाई, रिसर्च, सुविधाओं में लगना था, वो ऑनलाइन गेमिंग में झोंक दिया गया.
शातिर दिमाग और सिस्टम का दुरुपयोग
पंजाब एंड सिंध बैंक में तैनात एक अधिकारी — बेदांशु शेखर मिश्रा. ईडी की जांच में सामने आया कि उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 46 FD खातों को फर्जी तरीके से तोड़ दिया.
बिना किसी इजाज़त, बिना किसी वैध प्रक्रिया के करोड़ों रुपये निकालकर उन्हें अवैध ऑनलाइन गेमिंग पोर्टल्स में लगा दिया गया — जहां सट्टे की दुनिया में पैसा कई गुना किया जाता है.
यह कोई अकेला कारनामा नहीं था, बैंक के अंदर की मिलीभगत, बाहर से तकनीकी सहयोग और लालच की गठजोड़ ने इस घोटाले को अंजाम दिया.
FD से फंडिंग, गेमिंग से काली कमाई
ईडी की रिपोर्ट कहती है कि जिन संस्थानों के एफडी से पैसा निकाला गया, वो करोड़ों रुपये बाद में सट्टा पोर्टल्स में इन्वेस्ट हुए. फिर उस पैसे से नकली मुनाफा कमाकर उसे सिस्टम से निकालने के रास्ते तलाशे गए.
ईडी का छापा और सबूतों की बौछार
जैसे ही ईडी को सुराग मिले, एक्शन शुरू हुआ.
बैंगलुरु में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी कई जगहों पर छापेमारी की गई.
₹38 लाख नकद जब्त
- 49 म्यूल खातों (यानि नाम के खातों) से जुड़े डेबिट कार्ड
- कई डिजिटल डिवाइस – लैपटॉप, हार्डड्राइव, मोबाइल
- अब इन सबकी जांच होगी – कौन, कब, कहां और कितना खेला?
बैंक खातों पर फ्रीज, आगे बढ़ रही जांच
ईडी ने कई संदिग्ध बैंक खातों को तुरंत फ्रीज कर दिया — ताकि अब एक पैसा भी बाहर न जा सके.
जांच एजेंसी का मानना है कि यह घोटाला ₹53 करोड़ से भी बड़ा हो सकता है, और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इसमें और नाम और संस्थाएं सामने आ सकती हैं.
सबक की बात
यह मामला सिर्फ ऑनलाइन सट्टेबाजी का नहीं, यह उस भरोसे के टूटने की कहानी है जो शैक्षणिक संस्थाएं बैंकिंग सिस्टम पर करती हैं.
यह एक सिस्टमेटिक साजिश थी, जहां FD जैसा सुरक्षित निवेश भी लालच और तकनीक के सहारे लूटा गया
