बैंकिंग सेक्टर में धोखाधड़ी को लेकर हाल ही में जारी हुए RBI आंकड़े चौंकाने वाले हैं. वित्त वर्ष 2023 (FY23) से लेकर वित्त वर्ष 2025 (FY25) के बीच धोखाधड़ी के मामलों और उससे जुड़ी रकम में बड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया है.
साइबर क्राइम के मामले-
- FY23: 13,494 मामले थे.
- FY24: 36,060 मामले (167.2% की बढ़ोतरी) थे.
- FY25: 23,953 मामले (33.6% की गिरावट FY24 से) थे.
साफ है कि FY24 में धोखाधड़ी के मामलों में अचानक तेजी आई, लेकिन FY25 में उनकी संख्या में कुछ राहत दिखी.
रकम में बड़ा उलटफेर:
- FY23: ₹18,981 करोड़ रुपये था.
- FY24: ₹12,230 करोड़ (35.6% की गिरावट) रुपये था.
- FY25: ₹36,014 करोड़ (194.5% की उछाल) रुपये हो गया.
FY25 में कुल मामलों की संख्या तो घटी, लेकिन धोखाधड़ी की रकम तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ गई, जो चिंता का विषय है.
किस बैंक:
- पब्लिक सेक्टर बैंक:-FY25 में कुल धोखाधड़ी की राशि का 71.3% यानी ₹25,667 करोड़ इन्हीं बैंकों से संबंधित रहा.
- प्राइवेट सेक्टर बैंक:-केस की संख्या सबसे ज्यादा — 14,233 मामले आए है. लेकिन धोखाधड़ी की रकम तुलनात्मक रूप से कम रही.
FY25 में रकम इतनी ज्यादा क्यों?
FY25 के आंकड़ों में 122 पुराने मामलों (राशि ₹18,674 करोड़) को शामिल किया गया है जिन्हें पुनः जांच के बाद धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत किया गया.यानी यह रकम पहले से सिस्टम में थी, लेकिन धोखाधड़ी की पुष्टि अब जाकर हुई.
क्या कहती है ये तस्वीर?
मामलों की संख्या में गिरावट एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन राशि की गंभीरता यह दिखाती है कि बड़ी धोखाधड़ी अब भी सिस्टम में छुपी हो सकती है.सरकारी बैंकों में धोखाधड़ी की रकम ज्यादा, तो निजी बैंकों में संख्या ज्यादा.RBI और बैंकिंग संस्थान अब अधिक सतर्क और पारदर्शी जांच की ओर बढ़ रहे हैं.
