मुंबई के साकीनाका इलाके की एक भीड़भरी रात थी. सड़क पर ट्रैफिक, हॉर्न और चाय की भाप के बीच किसी को क्या पता था कि होटल गेटवे स्टार के कमरे नंबर 203 में भारत से दुबई तक फैले सायबर ठगी के साम्राज्य का कंट्रोल रूम चल रहा है.
उस कमरे में बैठा था 25 साल का मोहम्मद मसूद अब्दुल वसीम जो दिखने में साधारण आईटी लड़का लगता था, पर असल में करोड़ों की डिजिटल ठगी का मास्टरमाइंड था.
कहानी की शुरुआत – कुछ पैसों की भूख से
मसूद पहले एक कॉल सेंटर में काम करता था. धीरे-धीरे उसे डार्क वेब की दुनिया का पता चला जहां लोगों के बैंक अकाउंट, चेक बुक और सिम कार्ड की डिटेल्स बेची जाती हैं.वहीं उसकी मुलाकात दुबई में बैठे दो भारतीय मूल के ठगों मोहसिन और ज़फर से हुई.शुरुआत में बस डेटा भेजने का काम था, लेकिन जल्द ही मसूद ने मुंबई में अपना लोकल नेटवर्क बना लिया.उसके तीन साथी अब्दुल्ला (24), नूर आलम (42) और मनीष (30) उसका साथ देने लगे.वे लोगों को लालच देकर बैंक खाते खुलवाते और उन खातों के डेबिट कार्ड, पासबुक, सिम कार्ड सब मसूद को दे देते.
हर अकाउंट का ₹10,000 मिलता था. फिर वही अकाउंट्स विदेश में बैठे ठगों के हवाले किए जाते थे, पुलिस पूछताछ में मसूद ने बताया.
पुलिस की गुप्त सूचना और ऑपरेशन ‘गेटवे’
मुंबई सायबर पुलिस को कुछ दिन पहले सूचना मिली थी साकीनाका के एक होटल में ठगों का गिरोह ठहरा है, जो बैंक डिटेल्स विदेश भेज रहा है.पुलिस टीम ने देर रात होटल गेटवे स्टार पर छापा मारा.कमरा नंबर 203 के दरवाजे पर दस्तक दी गई.मसूद ने दरवाजा खोला कमरे में लैपटॉप, पासपोर्ट, यूएई आईडी कार्ड, 7 सिम कार्ड और 10 मोबाइल फोन बिखरे पड़े थे.जांच में सामने आया कि वह दुबई के ठग मोहसिन और ज़फर को भारतीय बैंक डिटेल्स भेज रहा था.पुलिस ने वहीं से उसे गिरफ्तार किया.फिर मसूद ने साई गेस्ट हाउस का पता दिया जहां से तीन और आरोपी पकड़े गए.
केस दर्ज और इंटरनेशनल लिंक उजागर
पुलिस ने इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और 3(5) (साझी साजिश) के तहत मामला दर्ज किया है, साथ ही आईटी एक्ट के प्रावधान भी जोड़े गए हैं.फिलहाल दो आरोपी अब्दुल खालिक और अरबाज फज़लानी फरार हैं, जबकि दुबई में बैठे मोहसिन और ज़फर की लोकेशन ट्रेस की जा रही है.
एक अधिकारी ने कहा -यह सिर्फ मुंबई का केस नहीं है. यह भारत और खाड़ी देशों को जोड़ने वाला ठगी नेटवर्क है. हर अकाउंट के पीछे एक आम इंसान का नुकसान छिपा है.
एक आम आदमी की कहानी
इस नेटवर्क से ठगे गए लोगों में सांताक्रूज़ के विजय पाटिल भी हैं. उनका बैंक अकाउंट एक फर्जी कॉल पर अपडेट कराया गया था.
विजय कहते हैं मुझे लगा बैंक वाला बोल रहा है, मैंने ओटीपी बता दिया. कुछ घंटे में अकाउंट खाली. बाद में पता चला, मेरे नाम का अकाउंट दुबई में ठगी के लिए इस्तेमाल हुआ.
कहानी का सबक
सायबर ठग अब सिर्फ कॉल या ईमेल तक सीमित नहीं हैं
वे अब आपके बैंक के हर डेटा का सौदा कर रहे हैं.
किसी भी अनजान कॉल पर केवाईसी या अकाउंट अपडेट की जानकारी न दें.
बैंक या सरकारी एजेंसी कभी लिंक या ओटीपी नहीं मांगती.
किसी संदिग्ध गतिविधि की शिकायत करें: www.cybercrime.gov.in या हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें.
मसूद अब जेल में है, लेकिन उस कमरे नंबर 203 की कहानी बताती है सायबर क्राइम अब दीवारों के भीतर नहीं, बल्कि स्क्रीन के पार होता है और शायद, अगली बार उस स्क्रीन के उस पार आपका नाम भी हो सकता है…
