पटना का 23 साल का शाह आलम जब अप्रैल 2025 में डेटा एंट्री की नौकरी के लिए कंबोडिया गया,तो उसने सोचा था कि ज़िंदगी बदल जाएगी.पर वहां जो हुआ, उसने उसे साइबर गुलाम बना दिया – और फिर पेशेवर ठग भी.चार महीने तक कंबोडिया के साइबर स्कैम कैंप में बंद रहने के बाद,जब वह अगस्त में भारतीय दूतावास की मदद से बच निकला और भारत लौटा –
तो सबको लगा कि अब वह सुधर जाएगा.लेकिन असली खेल तो उसके लौटने के बाद शुरू हुआ.
कहानी की शुरुआत – नकली आइशानी और एक सच्चा प्यार-कर्नाटक के उत्तरा कन्नड़ ज़िले का एक 47 साल का बिजनेसमैननिकाहफॉरएवर डॉट कॉम (Nikahforever.com) पर शादी के लिए प्रोफाइल देख रहा था.वहीं उसकी नज़र पड़ी एक लड़की पर – नाम था Aishani.
बातचीत शुरू हुई, फिर चैट्स, कॉल्स, इमोशंस… और धीरे-धीरे भरोसा.उसे क्या पता था कि आइशानी असल में कोई लड़की नहीं,बल्कि बिहार का वही लड़का शाह आलम था,जो कंबोडिया से भागकर अब भारत में वही फ्रॉड दोहरा रहा था.
प्यार के नाम पर ठगी – 46 लाख रुपये गायब-पुलिस के मुताबिक, व्यापारी ने जून से जुलाई के बीच लगभग ₹36 लाख,ट्रेडिंग और गिफ्ट्स के नाम पर आइशानी को भेजे.इसके बाद आलम ने कहानी को और पक्का किया -वो कभी माँ की तबीयत खराब बताता,कभी लोन चुका देना है कहकर पैसे मांगता.
यहां तक कि एक दिन उसने कहा -मैं आपकी आइशानी का नौकर हूं, उसने आपके भेजे गिफ्ट्स लेने मुझे भेजा है.वो हैदराबाद एयरपोर्ट तक पहुंच गया और वहां से MacBook और गिफ्ट्स लेकर फरार हो गया.
कहां से सीखा ठगी का ये खेल
शाह आलम ने बायोमेडिकल साइंसेज में पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी.कंबोडिया में उसे डेटा एंट्री जॉब के बहाने-एक फ्रॉड कंपनी के कैंप में ले जाया गया.वहां उसका काम था -भारत में बैठे लोगों से ऑनलाइन चैटिंग कर पैसा लूटना.
वो कहता है -हमें दिन में 14 घंटे काम करवाते थे. वेतन रोक लिया गया था.जो ज़्यादा पैसा ठगता, उसे छुट्टी मिलती थी.आलम को भी ऐसा ही मौका मिला -आधे दिन की छुट्टी में वह किसी तरह भारतीय दूतावास पहुंचा और बचकर वापस भारत आ गया.पर भारत लौटकर उसने
वही स्क्रिप्ट, वही फेक आइडेंटिटी फिर से शुरू कर दी.
पुलिस का जाल और गिरफ्तारी
जब व्यापारी को बार-बार पैसे की मांग से शक हुआ,तो उसने पुलिस में शिकायत की.उत्तरा कन्नड़ की CEN (Cyber Crime, Economic Offences & Narcotics) पुलिस ने
डिप्टी SP बी. अश्विनी के नेतृत्व में एक प्लान बनाया –
आप बात करते रहिए, हम उसे पकड़ लेंगे.
आलम ने अगली बार ₹40 लाख आइशानी की माँ के इलाज के लिए मांगे.
और कहा – मैं खुद पैसे लेने आ रही हू.पुलिस ने जांच की -आइशानी हैदराबाद से आने की बात कर रही थी,लेकिन टिकट दिल्ली से बुक हुआ था – नाम था शाह आलम.9 नवंबर को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर पुलिस ने उसे दबोच लिया.अब वह पुलिस हिरासत में है.
पुलिस अधिकारी बोले
यह अब तक का अनोखा केस है.पहले यह लड़का ठगी का शिकार हुआ, फिर खुद ठग बन गया.उसने न सिर्फ भारत में, बल्कि कंबोडिया से भी कई लोगों को फंसाया.
सीख – ऑनलाइन रिश्तों में भी साइबर सावधानी जरूरी
शादी या रिलेशनशिप वेबसाइट पर कभी भी पैसे या गिफ्ट न भेजें.
किसी भी व्यक्ति की पहचान की वीडियो कॉल या दस्तावेज़ों से पुष्टि करें.
कोई इमरजेंसी का बहाना बनाए, तो पहले जांचें, फिर कदम उठाएं.
अगर धोखा हुआ हो, तो तुरंत 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें.
अंत – ठगी से ठग तक का सफर
कंबोडिया में गुलाम बना शाह आलम
अब अपने ही देश में ठग बन गया.
उसके लिए डिजिटल क्राइम एक काम बन गया –
जैसे किसी और के लिए ऑफिस की नौकरी.
वो पहले जाल में फंसा था, अब खुद जाल बुनने लगा.
यह कहानी सिर्फ शाह आलम की नहीं,
बल्कि उन सबकी चेतावनी है जो ऑनलाइन भरोसा कर लेते हैं.
क्योंकि अब ठग प्यार नहीं मांगते –
वे OTP, अकाउंट नंबर और आपके भरोसे से ही लूट लेते हैं.
