नोएडा की एक सोसायटी के छोटे-से फ्लैट में बैठे कृष्ण यादव बार-बार अपने लैपटॉप पर ट्रेडिंग अकाउंट खोलने की कोशिश कर रहे थे लेकिन स्क्रीन पर वही पुराना मैसेज चमक रहा था. Access Denied – Account Frozen. कभी मर्चेंट नेवी में कैप्टन रहे कृष्ण की ज़िंदगी का एक ही पैशन था ट्रेडिंग.समंदर छोड़कर उन्होंने स्टॉक मार्केट में कदम रखा और सोचा, अब घर से ही अपनी कमाई बना लूंगा.लेकिन अगस्त 2025 ने सब कुछ बदल दिया.
कहानी की शुरुआत – सूरत से आया ‘गोल्डन ऑफर’ कुछ महीने पहले एक ट्रेडिंग ग्रुप में कृष्ण की मुलाकात हुई Green Wall Enterprises के लोगों से.उन्होंने बताया हम Jainam Stock Broking के पार्टनर हैं. हमारे पास प्रॉप ट्रेडिंग मॉडल है, जहां हाई लीवरेज के साथ बड़ी कमाई हो सकती है.
कृष्ण ने पूछा, कितना इन्वेस्ट करना होगा?
जवाब आया बस ₹10 लाख, बाकी हम लिमिट देंगे.उन्हें भरोसा हो गया क्योंकि सब कुछ प्रोफेशनल अंदाज़ में चल रहा था ट्रेडिंग टर्मिनल, डेली रिपोर्ट्स, और मुनाफे के स्क्रीनशॉट.कृष्ण ने अपनी जिंदगी की सेविंग्स Green Wall को ट्रांसफर कर दीं.
14 अगस्त 2025 – जब सब खत्म हो गया
सुबह 9:15 बजे कृष्ण ने रोज़ की तरह टर्मिनल लॉगिन किया, लेकिन स्क्रीन ब्लैंक थी.
कॉल किया नंबर स्विच ऑफ.
मेल भेजा कोई जवाब नहीं.
दोपहर तक पूरे ग्रुप में अफरा-तफरी मच गई.
किसी ने लिखा Green Wall के ऑफिस बंद हैं.
किसी ने भेजा iTrade Associates भी गायब हो गए.
कृष्ण ने हड़बड़ी में सूरत फोन किया, जहां से जवाब मिला -Green Wall के हेड नितिन शाह और हिरेन जादव फरार हो गए हैं. 150 करोड़ रुपये का खेल था.
नोएडा में दूसरा चेहरा – iTrade Associates
Green Wall से जुड़ी दूसरी फर्म iTrade Associates (ग्रेटर नोएडा) चलाते थे दर्शन जोशी (DJ).
वे भी वही मॉडल चला रहे थे निवेशकों से पैसा लेकर ट्रेडिंग लिमिट देना.
कृष्ण बताते हैं -मुझे कहा गया था कि पैसा Green Wall के ज़रिए DB Wealth और Ashapura Commodities से Jainam Broking तक जाएगा. पर Jainam ने कहा ‘हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं.’ तभी समझ आया कि यह पूरा सिस्टम फर्जी था.
दर्शन जोशी अब खुद को भी पीड़ित बताते हैं -मैं भी इसमें फंसा हूं. सूरत और नोएडा दोनों जगह FIR करवा रहा हूं. मैं चाहता हूं कि निवेशकों को उनका पैसा मिले.
सपने से तबाही तक सबसे बड़ा अनरेगुलेटेड ट्रेडिंग स्कैम-शुरुआत में यह मामला ₹5 करोड़ का लगा, लेकिन अब अनुमान है कि कुल नुकसान ₹150 करोड़ से ज्यादा है.कई निवेशक कैश में पैसा दे चुके थे, किसी ने ट्रस्ट बेस्ड ट्रांसफर किया था, इसलिए आधे मामले दर्ज ही नहीं हो पाए.मुख्य आरोपी हिरेन जादव गिरफ्तार है, जबकि नितिन शाह अब भी फरार है.सूरत पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) जांच में जुटी है.
कृष्ण यादव की टूटी उम्मीदें
कृष्ण अब हर सुबह अपने बैंक पासबुक को देखते हैं और कहते हैं पहले समंदर में तूफान से लड़ता था, अब स्क्रीन पर धोखाधड़ी से हार गया.उनकी पत्नी पूछती हैं, अब क्या करेंगे? कृष्ण चुप रह जाते हैं. बस इतना कहते हैं.इस बार ट्रेडिंग नहीं करूंगा… लोगों को सिखाऊंगा कि कैसे ठगी से बचना है.
कहानी का सबक
Unregistered फर्मों से ट्रेडिंग न करें, चाहे रिटर्न कितना भी आकर्षक लगे.
हमेशा ब्रोकर की SEBI रजिस्ट्रेशन डिटेल्स जांचें.
कैश या ट्रस्ट बेस्ड ट्रांसफर से बचें.
हाई लीवरेज का मतलब हाई रिस्क होता है, हाई रिटर्न नहीं.
ठगी का संदेह हो तो तुरंत www.cybercrime.gov.in
या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें.
कृष्ण यादव आज भी अपने ट्रेडिंग ग्रुप में एक बात दोहराते हैं
फ्रॉड के पीछे सिर्फ पैसे नहीं खोते… इंसान अपनी मेहनत, नींद और भरोसा भी हार जाता है.
