गुजरात के सूरत में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक ऐसी साइबर ठगी गैंग का पर्दाफाश किया है, जिसने देशभर के सैकड़ों लोगों से 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा की ठगी कर ली थी.यह गिरोह इतना चालाक था कि लोगों को “डिजिटल गिरफ्तारी” तक का डर दिखाकर पैसे वसूलता था.
कैसे हुआ खुलासा
सूरत पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने अक्टूबर 2024 में एक FIR दर्ज की थी, जिसमें फर्जी समन और ऑनलाइन धमकियों का ज़िक्र था.जांच आगे बढ़ी तो ED की टीम ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया.मक़बूल अब्दुल रहमान डॉक्टर, उसका बेटा काशिफ मक़बूल डॉक्टर, महेश मफतलाल देसाई और ओम राजेन्द्र पंड्या.
सभी पर मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत कार्रवाई हुई.
क्या करते थे ये लोग- गिरोह का तरीका बेहद खतरनाक और मनोवैज्ञानिक था.लोगों को फर्जी कानूनी नोटिस भेजे जाते थे, जिन पर लिखा होता था.आपके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट / ED में मामला दर्ज है…या फिर कॉल आता था – “आपका नाम मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग केस में है. अपनी जांच के लिए तुरंत पैसे जमा कराइए…
लोग डर के मारे पैसे ट्रांसफर कर देते थे.कई मामलों में इन्हें “डिजिटल अरेस्ट” कहा गया यानी पीड़ित को ऑनलाइन ही डराकर,वीडियो कॉल पर निगरानी रखी जाती थी और उससे बार-बार पैसे भेजने को कहा जाता था.
पैसे का रास्ता: बैंक से क्रिप्टो तक
ED की जांच में पता चला कि गिरोह ने देशभर में डमी कर्मचारियों और फर्जी नामों से बैंक खाते खोले,जो पहले से एक्टिव सिम कार्ड्स से संचालित किए जाते थे ताकि असली पहचान छिपी रहे.इन खातों में आए करोड़ों रुपये को पहले क्रिप्टोकरेंसी (USDT/Tether) में बदला गया,
फिर हवाला नेटवर्क के ज़रिए विदेश भेज दिया गया. इससे पैसा ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो गया.
गिरफ्तार चारों आरोपियों को अहमदाबाद की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां ED को 5 दिन की कस्टडी मिली ताकि बाकी नेटवर्क की जड़ें खोजी जा सकें. अधिकारियों का कहना है कि ये गिरोह कई राज्यों में फैले एक बड़े साइबर सिंडिकेट का हिस्सा है.
ED की चेतावनी और संदेश
ED अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अपराधी टेक्नोलॉजी, डर और भरोसे तीनों का गलत इस्तेमाल करते हैं. लोगों को डराकर पैसे निकलवाना अब ऑनलाइन दुनिया की सबसे बड़ी ठगी बन चुका है. यह केस यह भी साबित करता है कि क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क मिलकर ठगों को वैश्विक स्तर पर गुमनाम बना देते हैं.
क्या सीखें- किसी भी कॉल या मेल पर “ED, CBI या कोर्ट” का नाम सुनकर डरें नहीं. हमेशा असली नंबर या ईमेल आईडी को क्रॉस-चेक करें.
कभी भी पैसे ट्रांसफर न करें अगर कोई कहे कि “आप जांच में फंसे हैं. संदिग्ध कॉल की तुरंत शिकायत करें साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर.असली सरकारी समन डाक या आधिकारिक पोर्टल से ही आते हैं, WhatsApp या ईमेल से नहीं.
