माइक्रोसॉफ्ट ने Windows 10 यूज़र्स के लिए बड़ी चेतावनी जारी कर दी है. कंपनी 14 अक्टूबर 2025 से इसका सपोर्ट बंद कर रही है. इस तारीख के बाद Windows 10 चलाने वाले डिवाइस पर सिक्योरिटी अपडेट नहीं आएंगे. नतीजाये डिवाइस हैकर्स और मालवेयर के लिए आसान शिकार बन जाएंगे.
माइक्रोसॉफ्ट ने साफ कर दिया है कि 14 अक्टूबर 2025 के बाद Windows 10 का सपोर्ट पूरी तरह खत्म हो जाएगा. इसका सीधा मतलब है कि इस ओएस पर अब मुफ्त सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिलेंगे. दुनिया भर में अभी भी 40 करोड़ से ज्यादा डिवाइस Windows 10 पर चल रहे हैं, ऐसे में साइबर अटैक का खतरा कई गुना बढ़ सकता है. जिन यूज़र्स के पास Windows 11 के लिए जरूरी हार्डवेयर नहीं है, उनके सामने अब बड़ा सवाल खड़ा हैअपग्रेड करें या रिस्क लें.
क्यों है ये बड़ी चिंता
Windows 10 अभी भी दुनिया भर में 400 मिलियन (40 करोड़) से ज्यादा डिवाइस पर चलता है. इसका सपोर्ट खत्म होते ही इतने बड़े यूज़रबेस पर साइबर हमलों का खतरा अचानक बढ़ जाएगा. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पुराने सिस्टम को टारगेट करना हैकर्स के लिए आसान होता है. 2017 का WannaCry अटैक इसका उदाहरण है, जब पुराने Windows वर्जन में कमजोरी का फायदा उठाकर लाखों सिस्टम प्रभावित हुए थे.
Windows 11 पर शिफ्ट की चुनौती
माइक्रोसॉफ्ट यूज़र्स को Windows 11 पर शिफ्ट होने की सलाह दे रहा है. लेकिन इसके लिए TPM 2.0 और Secure Boot जैसे हार्डवेयर फीचर्स जरूरी हैं. कई पुराने पीसी इन मानकों पर खरे नहीं उतरते. ऐसे में यूज़र्स को या तो नया सिस्टम खरीदना होगा या फिर सिक्योरिटी रिस्क लेना होगा.
Windows 10 बंद होने के बाद क्या होगा
Windows 10 डिवाइस काम करते रहेंगे, लेकिन सिक्योरिटी अपडेट नहीं आएंगे.कोई नया फीचर अपडेट या टेक्निकल सपोर्ट नहीं मिलेगा.समय के साथ मालवेयर और जीरो-डे वल्नरेबिलिटी का खतरा बढ़ता जाएगा.
ऐसे रहेंगे सेफ
Windows 11 पर अपग्रेड करें सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद ऑप्शन है.ESU (Extended Security Updates) प्रोग्राम लें माइक्रोसॉफ्ट का पेड प्रोग्राम, जिसमें तीन साल तक एक्स्ट्रा सिक्योरिटी अपडेट मिलेंगे (2028 तक).Microsoft 365 Apps का इस्तेमाल करें Microsoft 365 सब्सक्रिप्शन वाले यूज़र्स को कुछ समय तक ऐप्स का सपोर्ट मिलता रहेगा, भले ही Windows 10 पर चल रहे हों.
बेसिक सिक्योरिटी प्रैक्टिस फॉलो करें एंटीवायरस अपडेट रखें, संदिग्ध फाइल्स न खोलें और नेटवर्क सिक्योरिटी पर ध्यान दें.
कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
आईटी मैनेजर्स और साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स के लिए यह महज सॉफ्टवेयर अपग्रेड नहीं है, बल्कि ऑपरेशनल स्टेबिलिटी, रेगुलेटरी कंप्लायंस और बजट प्लानिंग का बड़ा सवाल है. अगर समय रहते अपग्रेड नहीं किया गया तो डाटा ब्रीच और भारी वित्तीय नुकसान का खतरा है.
