तिरुवनंतपुरम के एक शांत गांव में शादी की हलचल थी. बैंड बज रहे थे, मिठाइयों की खुशबू हवा में थी, और एक पंचायत सदस्य—सीजे अनीश—अपनी नई दुल्हन रेशमा से शादी करने जा रहा था. लेकिन ये शादी किसी सुखद जीवन की शुरुआत नहीं थी, बल्कि एक ऐसे राज़ का पर्दाफाश होने वाली थी, जिसने दर्जनों परिवारों को झकझोर दिया.
रेशमा की कहानी एक परियों की कहानी जैसी लगती है—सुंदर, सभ्य, मिलनसार. वह अक्सर कहती, “मैं बस किसी से सच्चा प्यार चाहती हूं.” लेकिन सच्चाई कुछ और ही थी.
उदयंपेरूर, एर्नाकुलम की रहने वाली रेशमा ने कॉलेज के दिनों में ही “इमोशनल इंटेलिजेंस” का गज़ब इस्तेमाल करना सीख लिया था. 2014 में जब वह डिग्री की छात्रा थी, पहली बार प्यार के नाम पर एक युवक के साथ भागी. तीन साल तक साथ रहने के बाद यह रिश्ता खत्म हुआ, लेकिन यहीं से शुरू हुआ उसका असली खेल—”शादी का व्यवसाय.”
रेशमा ने अलग-अलग नामों से मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स पर प्रोफाइल बनाई. हर बार एक नई कहानी—कभी अनाथ बताकर, कभी विधवा बनकर, कभी तलाकशुदा. उसकी मीठी बातों में फंसकर कई पुरुष उसके प्यार में पड़ गए और शादी के लिए तैयार हो गए.
हर शादी एक जैसी होती—फेरे, मिठाई, आशीर्वाद… और फिर अगले दिन रेशमा गायब. साथ में ले जाती सोने के गहने, नकद पैसे और कुछ नहीं तो मोबाइल फोन तक.
कई बार उसने दो-दो शादियां महज़ 10 दिन के अंतराल में की. वह न केवल शादी करती, बल्कि एक नई जिंदगी शुरू करने का अभिनय भी करती. उसके पास एक 2 साल का बच्चा था, जिसे वह कभी बताती कि यह रिश्तेदार का है, तो कभी कहती कि वह बच्चा ही नहीं है.
लेकिन इस बार गलती हो गई.
अनीश, ग्राम पंचायत का सदस्य, उससे शादी करने वाला था. शादी से एक दिन पहले वह उसे अपने दोस्त के घर ले गया, ताकि शादी की अगली सुबह वहीं से कार्यक्रम शुरू हो सके. लेकिन सुबह कुछ अजीब हुआ.
“आज के दिन भी कोई नहाए नहीं?” दोस्त की पत्नी ने आश्चर्य से पूछा.
रेशमा ने मुस्कराते हुए कहा, “ब्यूटी पार्लर जाना है, वहीं तैयार हो जाऊंगी.”
शंका बढ़ी. जब रेशमा पार्लर गई, तब दोस्त की पत्नी और अनीश ने उसका बैग चेक किया. अंदर मिले—पुरानी शादी के दस्तावेज़, एक बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र और एक नई शादी का निमंत्रण—12 जून को किसी और के साथ.
बात थाने पहुंची. पुलिस टीम ने शादी हॉल में छापा मारा और रेशमा को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह अब तक 12 शादियां कर चुकी है. अगली शादी पहले से तय थी.
पूछने पर रेशमा ने कहा, “मैं पैसों के लिए नहीं करती. मुझे प्यार चाहिए, जो हर बार अधूरा रह जाता है.”
अंत:
रेशमा की कहानी आज भी जारी है. पुलिस को शक है कि कई लोग सामने नहीं आ रहे, शर्म के कारण. शायद दर्जनों और शादियां हुई हैं, जिनके दस्तावेज़ किसी बैग में पड़े हैं.
ये कहानी एक चेतावनी है—डिजिटल जमाने की धोखेबाज़ियों से बचने की, और यह समझने की कि हर मुस्कराती तस्वीर के पीछे एक सच्चाई छुपी होती है.
