Saturday, March 14, 2026
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₹47 करोड़ की साइबर ठगी: बेंगलुरु में 8वीं पास प्लंबर ने हांगकांग हैकर्स संग मिलकर लूटी NBFC कंपनी

by Anuradha Pandey

बेंगलुरु में हुआ एक ऐसा साइबर फ्रॉड जिसने पुलिस तक को हैरान कर दिया. एक 8वीं पास प्लंबर और 10वीं पास डिजिटल मार्केटिंग कर्मचारी ने हांगकांग के हैकर्स को हायर कर ₹47 करोड़ की बड़ी चोरी अंजाम दी. यह पैसा एक NBFC कंपनी के खातों से कुछ ही घंटों में 650 से ज्यादा खातों में ट्रांसफर किया गया. पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो और आरोपी दुबई में फरार हैं.

दो कम पढ़े-लिखे लेकिन चालाक दिमाग
यह कहानी किसी फिल्म जैसी लगती है, लेकिन यह सच्चाई है.बेंगलुरु की एक NBFC कंपनी, जो लोन ऐप के जरिए ₹5 लाख तक के लोन देती थी, उसके सिस्टम को हैक कर ₹47 करोड़ उड़ा लिए गए.
इस ठगी के पीछे दो नाम थे
संजय पटेल (43), एक प्लंबर, जो राजस्थान के उदयपुर का रहने वाला है.
इस्माइल रशीद अत्तर (27), बेलगावी का डिजिटल मार्केटिंग कर्मचारी.

हांगकांग से हुआ हमला, दुबई में बैठे थे मास्टरमाइंड-पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि इन दोनों ने दुबई में बैठे दो साथियों के साथ मिलकर हांगकांग के हैकर्स को हायर किया.हैकर्स ने NBFC की बैंकिंग सिस्टम की API सिक्योरिटी को तोड़कर पैसा ट्रांसफर किया.सिर्फ ढाई घंटे में कंपनी के खातों से 1,782 ट्रांजेक्शन हुए और पैसा 656 खातों में भेजा गया.

ठगी का रास्ता – सर्वर से लेकर IP तक का जाल
दुबई के आरोपियों ने पांच सर्वर रेंट पर लिए और IP एड्रेस खरीदे.हांगकांग और लिथुआनिया के IP का इस्तेमाल करके बैंक के सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर को बायपास किया गया.₹5.5 करोड़ हैदराबाद की एक कंपनी के खाते में भेजे गए, फिर वहां से दूसरे खातों में ट्रांसफर हुए.

पुलिस ने ₹10 करोड़ की रकम फ्रीज़ की है, लेकिन बाकी रकम का कोई पता नहीं.

कैसे हुआ खुलासा
NBFC के सीनियर मैनेजर ने 9 अगस्त को साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.उन्होंने बताया कि 6-7 अगस्त के बीच कई संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुए, जो कंपनी के ऑफिस के सिस्टम या रजिस्टर्ड IP से नहीं हुए थे.पुलिस की जांच में जब ट्रांजेक्शन की डिजिटल ट्रेल ट्रैक की गई, तो मामला खुल गया.

अब तक की कार्रवाई
संजय पटेल को 25 सितंबर को गिरफ्तार किया गया, उसके खाते में ₹27 लाख मिले.इस्माइल अत्तर को 9 अक्टूबर को अरेस्ट किया गया, उसने ही IP एड्रेस मुहैया कराए थे.बाकी दो आरोपी अभी भी दुबई में फरार हैं.मामला IT Act और BNS की कई धाराओं के तहत दर्ज हुआ है.

पुलिस कमिश्नर सीमंत कुमार सिंह का बयान-पैसे का पूरा लेन-देन ढाई घंटे के भीतर हुआ. कंपनी के ऐप को हैक करके ट्रांजेक्शन किए गए. हम दुबई के दोनों आरोपियों की तलाश में हैं.”

कहानी का सबक:
कम पढ़े-लिखे लेकिन चालाक दिमाग आज साइबर क्राइम का सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं.
एक क्लिक, एक सर्वर और कुछ फेक IP… और करोड़ों गायब!
अब ये अपराधी गांव या गली से नहीं, ग्लोबल नेटवर्क से खेल रहे हैं.

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