पात्र:
रणवीर बिजारणियां: सीकर का एक महत्वाकांक्षी युवक
सुभाष बिजारणियां: रिटायर्ड फौजी
राजल जांगिड़: धोलेरा में ज़मीन बेचने वाला
बनवारी महारिया, राकेश लखानी और एक दिल्लीवाला: चेन सिस्टम वाले खिलाड़ी
कहानी शुरू होती है साल 2014 में…
सीकर का रहने वाला रणवीर बिजारणियां एक दिन सुनता है कि कोई राजल जांगिड़ गुजरात के धौलेरा सिटी के पास सस्ते में ज़मीन बेच रहा है. “धंधा तगड़ा है,” उसने सोचा और जा पहुंचा राजल के पास. कुछ ज़मीन खरीदी और देखा—वैल्यू बढ़ गई!
अब रणवीर को पैसों की भूख लगी. वो अपने रिटायरमेंट के करीब पहुंचे मामा जैसे दोस्त सुभाष बिजारणियां के पास गया. सुभाष फौज में थे, देश सेवा करते हुए पैसे भी जोड़ लिए थे. रिटायर हुए तो करीब 30 लाख हाथ आए. रणवीर ने कहा, “मामा, ये ज़मीन तगड़ा मुनाफा दे रही है. चलो साथ मिलकर बड़ा खेल खेलते हैं.”
सुभाष भी मान गए.
10 बीघा ज़मीन ली और देखते ही देखते उसका रेट 30 लाख से बढ़कर 50 लाख हो गया. अब गेम में एंट्री हुई कुछ पुराने घोटालेबाजों की—बनवारी, राकेश और एक दिल्ली वाला. उन्होंने एक सुअर फॉर्म चिटफंड स्कीम में सुभाष के पूरे 50 लाख डुबो दिए.
सुभाष बुरी तरह टूट गए. लेकिन वहीं से उनके दिमाग में एक “बड़ा प्लान” तैयार हुआ.
उन्होंने रणवीर के साथ मिलकर प्लान बनाया—“नेक्सा एवर ग्रीन प्रोजेक्ट”. ऑफर सीधा-सपाट और लुभावना—सस्ते में फ्लैट, वरना ज्यादा ब्याज के साथ पैसे वापस. लोकेशन? गुजरात की स्मार्ट सिटी—धौलेरा.
62,000 लोगों ने सपनों की ज़मीन का सपना देखा.
पैसे दिए. किसी को फ्लैट मिले, किसी को वादे. और बहुतों को मिला—धोखा. कंपनी ने करीब 1300 बीघा ज़मीन दिखाई, 2700 करोड़ रुपये जुटाए और लोगों को फंसा लिया एक फर्जी चेन सिस्टम में.
राजस्थान पुलिस ने सैकड़ों FIR दर्ज कीं.
अब कहानी में एंट्री हुई ईडी की.
12 जून को ED की टीम ने राजस्थान और गुजरात के 24 ठिकानों पर छापेमारी की. जयपुर, जोधपुर, सीकर, झुंझुनूं से लेकर अहमदाबाद तक सर्च चला. इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले, दस्तावेज जब्त हुए.
अब पर्दा धीरे-धीरे उठ रहा है.
“नेक्सा एवर ग्रीन” नाम की इस स्कीम के पीछे कौन-कौन शामिल थे, पैसा कहां गया, कौन बचा और कौन फंसेगा—इन सवालों का जवाब जल्द मिलेगा.
लेकिन एक बात तो साफ है—
सपनों की ज़मीन दिखाकर लोगों से उनकी ज़िंदगी की पूंजी छीनने वालों ने देशभर में एक बहुत बड़ा धोखा खेला. और अब जांच एजेंसियां इस खेल का हर पत्ता पलटने में जुट गई हैं.
कहानी का संदेश:
लालच में नहीं, समझदारी में निवेश करें. हर ज़मीन पर बना महल असली नहीं होता.
