दिल्ली में हर महीने करोड़ों रुपये की साइबर ठगी हो रही है बैंक फ्रॉड, UPI स्कैम, फेक कस्टमर केयर कॉल और ऑनलाइन फिशिंग के जरिए. अब इसे रोकने के लिए दिल्ली पुलिस को एक स्पेशल ट्रेनिंग दी गई है. गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) अब दिल्ली पुलिस को सिखा रहा है कि इलाके के “साइबर हॉटस्पॉट” कैसे पहचानें, ठगों के बैंक अकाउंट कैसे तुरंत फ्रीज़ करें और 1930 हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल्स को कैसे लाइव मॉनिटर कर लोगों का पैसा बचाया जाए.
आखिर हुआ क्या?
दिल्ली पुलिस के सीनियर अफसरों के लिए बुधवार को सेंट्रल दिल्ली स्थित I4C सेंटर में दो घंटे की एक खास वर्कशॉप रखी गई.यह वर्कशॉप किसी औपचारिक मीटिंग जैसी नहीं थी बल्कि “साइबर क्राइम वॉर रूम ट्रेनिंग” थी.इसमें स्पेशल कमिश्नर से लेकर DCP स्तर तक के अफसर मौजूद रहे.I4C के एक्सपर्ट्स ने उन्हें दो अहम टेक प्लेटफॉर्म्स Samanvay पोर्टल और Pratibimb ऐप का डेमो दिखाया.यही दो टूल आगे चलकर दिल्ली पुलिस की साइबर कंट्रोल स्ट्रैटेजी का सेंटर बनने वाले हैं.
Pratibimb App: ठगी के हॉटस्पॉट्स की पहचान
इस ऐप से पुलिस यह समझ सकेगी कि दिल्ली में कौन सा इलाका, कौन सी कॉल या कौन सा बैंक अकाउंट बार-बार साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रहा है.जैसे – कौन से Pincode से ज़्यादा शिकायतें आ रही हैं, कौन से मोबाइल नंबर या वॉलेट IDs बार-बार दोहराए जा रहे हैं.इससे पुलिस पहले से “रिस्क जोन” पहचान सकेगी और समय रहते वहां रेड या सस्पेक्टिव नेटवर्क्स पर नज़र रख सकेगी.
Samanvay Portal: राज्यों के बीच फास्ट डेटा शेयरिंग-कई बार फ्रॉड दिल्ली में होता है लेकिन पैसा किसी और राज्य के बैंक में पहुंचता है.इस पोर्टल से दिल्ली पुलिस दूसरे राज्यों की पुलिस, बैंकिंग नेटवर्क और डिजिटल वॉलेट कंपनियों से तुरंत डेटा शेयर कर सकेगी.मतलब ठग का अकाउंट, ट्रांज़ैक्शन हिस्ट्री और मोबाइल लिंक तुरंत स्क्रीन पर आ जाएगा.इससे रीयल टाइम में अकाउंट फ्रीज़ करना आसान होगा.
1930 हेल्पलाइन: मिनटों में एक्शन-I4C ने पुलिस को बताया कि 1930 हेल्पलाइन सिर्फ शिकायत सुनने के लिए नहीं है, बल्कि “लाइव रिकवरी सिस्टम” है.जब कोई शख्स ठगी की शिकायत करता है:
कॉल I4C सिस्टम में जाती है.
सस्पेक्ट अकाउंट को तुरंत फ्लैग कर दिया जाता है.
बैंक और वॉलेट कंपनियों को तुरंत “फ्रीज़ रिक्वेस्ट” भेज दी जाती है.
यानी अगर कोई यूजर 10-15 मिनट के भीतर कॉल करता है, तो पैसे को निकलने से पहले रोकने की संभावना काफी बढ़ जाती है.
साइबर ठगों के नए हथकंडे और इंटरनेशनल नेटवर्क-I4C टीम ने बताया कि साइबर ठगी अब इंडिया स्पेसिफिक नहीं रही.कई गिरोह अब नेपाल, बांग्लादेश और दुबई से ऑपरेट हो रहे हैं.इनका टारगेट अब सिर्फ कार्ड या ATM नहीं, बल्कि UPI लिंक, QR कोड, फेक डिलीवरी ऐप और सोशल मीडिया अकाउंट्स भी हैं.पुलिस को बताया गया कि अब ठग “AI-Generated फोटो और Deepfake आवाज़” का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.
दिल्ली में साइबर फ्रॉड का साइज कितना बड़ा?I4C की रिपोर्ट के मुताबिक –
दिल्ली अकेले में इस साल करीब ₹1000 करोड़ का नुकसान झेल चुकी है.
देशभर में हर महीने करीब ₹1000 करोड़ साइबर फ्रॉड में जा रहा है.हर दिन औसतन 4,000 से ज़्यादा शिकायतें दर्ज हो रही हैं.इनमें सबसे ज़्यादा केस UPI, Paytm, PhonePe और बैंक कस्टमर केयर फ्रॉड से जुड़े हैं.
अब क्या बदलेगा?
सेंट्रल गवर्नमेंट अब हर राज्य में “State-4C Command Centre” बनाने की योजना पर है.हरियाणा पुलिस ने इसे “S4C” नाम से शुरू भी कर दिया है.अब दिल्ली पुलिस इसके बाद अगली होगी.इससे राजधानी में एक “रीयल टाइम साइबर कंट्रोल रूम” बनेगा, जो हर जिले के नेटवर्क को सीधे लिंक करेगा.
क्यों जरूरी है ये पूरा सिस्टम?अब साइबर ठगी सिर्फ किसी आम आदमी का बैंक बैलेंस नहीं खा रही यह देश की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचा रही है.हर ठगी का पैसा डिजिटल इकोनॉमी से बाहर चला जाता है.I4C के मुताबिक यह “National Economic Threat” बन चुका है.
आम आदमी के लिए सीख:
किसी अनजान लिंक या QR कोड पर क्लिक न करें.
बैंक या वॉलेट से जुड़ी कोई कॉल आए तो नंबर गूगल कर वेरिफाई करें.
फ्रॉड होते ही 1930 पर कॉल करें जितनी जल्दी शिकायत, उतनी जल्दी रिकवरी.I4C की वेबसाइट cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें.
