सुबह का वक्त था. दिल्ली की सड़कें रोज की तरह लोगों से भरी थीं. ऑफिस जाने वालों की जल्दी थी. बच्चे स्कूल पहुंचने की तैयारी में थे. एक ई-रिक्शा भी अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रहा था. चालक को नहीं पता था कि कुछ सेकंड बाद उसके साथ ऐसा होने वाला है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी.
अचानक पीछे से एक कार उसके बराबर आई. कार में बैठे लड़कों ने मोबाइल निकाला. स्क्रीन पर कुछ टैप किया. अगले ही पल चलते-चलते ई-रिक्शा बीच सड़क पर रुक गया.
चालक घबरा गया. उसे लगा शायद बैटरी खत्म हो गई है. उसने दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश की. लेकिन तभी कार में बैठे लोग जोर-जोर से हंसने लगे. उन्होंने इसे “प्रैंक” बताया और वहां से निकल गए.
लेकिन सवाल सिर्फ मजाक का नहीं था.सवाल था… अगर पीछे से कोई तेज रफ्तार बस या ट्रक आ रहा होता, तो क्या होता?
दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. जहांगीरपुरी, संगम विहार, बदरपुर बॉर्डर, नई दिल्ली और पहाड़गंज जैसे इलाकों में चलते हुए ई-रिक्शा अचानक बंद होने के मामले सामने आते दिख रहे हैं.
वीडियो में कुछ लोग इसे मजाक बता रहे हैं. लेकिन साइबर एक्सपर्ट इसे सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि एक गंभीर डिजिटल खतरा मान रहे हैं.
आखिर ई-रिक्शा बंद कैसे हो रहा है?
जानकारों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर जिस एप की चर्चा हो रही है उसका नाम बैट-बीएमएस बताया जा रहा है.तकनीकी भाषा में यह बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम एप है.
इसका इस्तेमाल आम लोगों के लिए नहीं बनाया गया था.साइबर एक्सपर्ट सत्यम रस्तोगी के मुताबिक, इस एप का इस्तेमाल ई-रिक्शा एसेंबल करने वाली कंपनियां बैटरी की तकनीकी जांच के लिए करती हैं.
इस एप की मदद से बैटरी की स्थिति देखी जा सकती है. जैसे.
-बैटरी कितनी चार्ज है.
-वोल्टेज कितना है.
-तापमान कितना है.
-बैटरी की सेहत कैसी है.
इसके अलावा इसमें ऑन, ऑफ और रिस्टार्ट जैसे ऑप्शन भी मौजूद होते हैं.
फिर दिक्कत कहां से शुरू हुई?
समस्या तब शुरू हुई, जब इस एप की जानकारी आम लोगों तक पहुंच गई.कुछ शरारती लोग इसका इस्तेमाल सड़क पर चलते ई-रिक्शा के साथ मजाक करने के लिए करने लगे.
बताया जा रहा है कि वे पास से गुजरते हैं, मोबाइल से कनेक्ट करते हैं और ई-रिक्शा बंद कर देते हैं.यही वजह है कि कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.
क्या हर ई-रिक्शा खतरे में है?
नहीं, यह सबसे जरूरी बात है. यह एप हर ई-रिक्शा पर काम नहीं करता.
जानकारों के मुताबिक यह केवल उन्हीं ई-रिक्शा पर असर डाल सकता है.
जिनमें ब्लूटूथ कनेक्टिविटी वाली चीनी लिथियम-आयन बैटरी लगी हो.और जिनका ब्लूटूथ खुला हुआ हो.
अगर किसी ई-रिक्शा में पुरानी लेड-एसिड बैटरी लगी है, तो उस पर इस एप का कोई असर नहीं होगा.
आखिर यह तकनीक कैसे काम करती है?
यह एप ब्लूटूथ लो एनर्जी (BLE) तकनीक पर काम करता है.इसकी रेंज करीब 15 मीटर बताई जा रही है. अगर कोई व्यक्ति इस दूरी के अंदर है और बैटरी का ब्लूटूथ खुला है, तभी कनेक्शन बनने की संभावना होती है.
सबसे बड़ा खतरा क्या है?
सोचिए…ई-रिक्शा में बच्चे बैठे हैं. उसमें बुजुर्ग सफर कर रहे हैं. फिर वह किसी व्यस्त चौराहे को पार कर रहा है. अगर उसी समय वाहन अचानक बंद हो जाए, तो पीछे से आ रही गाड़ी टक्कर मार सकती है.
यात्री नीचे गिर सकते हैं. चालक घबरा सकता है. एक छोटा-सा डिजिटल मजाक कुछ ही सेकंड में बड़े हादसे में बदल सकता है.
यही वजह है कि साइबर एक्सपर्ट इसे सिर्फ “प्रैंक” नहीं मान रहे.
इससे बचने का तरीका क्या है?
जानकारों का कहना है कि जिन ई-रिक्शा में ऐसी बैटरी लगी है, उनके चालक कुछ सावधानी बरत सकते हैं.
बैटरी का ब्लूटूथ पासवर्ड बदल दें.अगर जरूरत न हो, तो मिस्त्री से कहकर ब्लूटूथ पूरी तरह बंद करवा दें. इससे अनजान लोगों के लिए बैटरी से कनेक्ट होना मुश्किल हो जाएगा.
क्या पुलिस तक मामला पहुंचा?
फिलहाल दिल्ली पुलिस के पास इस तरह की कोई आधिकारिक शिकायत नहीं पहुंची है.
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है.
उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है सोशल मीडिया पर किसी एप के प्रमोशन के लिए भ्रामक वीडियो फैलाए जा रहे हों.
हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि अगर इस तरह की कोई शिकायत मिलती है, तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी.
कहानी अभी खत्म नहीं हुई…
पहले साइबर अपराध बैंक खातों तक सीमित थे.फिर मोबाइल फोन निशाने पर आए.
अब अगर सड़क पर चलते वाहन भी डिजिटल तरीके से प्रभावित होने लगें, तो यह सिर्फ तकनीक का मामला नहीं रहेगा, बल्कि लोगों की सुरक्षा का भी सवाल बन जाएगा.
दिल्ली की सड़कों पर वायरल हो रहे ये वीडियो यही सवाल छोड़ रहे हैं…
क्या अब सड़क पर चलते वक्त सिर्फ ट्रैफिक से नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन से भी सावधान रहने की जरूरत है?
