साल 2017. नोएडा का सेक्टर-63. एक शानदार ऑफिस, बाहर महंगी गाड़ियां और अंदर सैकड़ों लोग कंप्यूटर स्क्रीन पर व्यस्त. जो भी उस ऑफिस के सामने से गुजरता, उसे लगता कि यहां कोई तेजी से बढ़ती आईटी कंपनी काम कर रही है. लेकिन उस इमारत के अंदर एक ऐसा डिजिटल जाल बुना जा रहा था, जो कुछ ही महीनों में लाखों लोगों की जिंदगी बदलने वाला था. किसी को अंदाजा नहीं था कि यहां भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन पोंजी घोटालों में से एक चल रहा है.
इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड था अनुभव मित्तल. उस समय वह ग्रेटर नोएडा की एक यूनिवर्सिटी में बीटेक फाइनल ईयर का छात्र था. कम उम्र में उसने Ablaze Info Solutions Private Ltd नाम की कंपनी बनाई और फिर SocialTrade.biz नाम की एक वेबसाइट लॉन्च कर दी. वेबसाइट का डिजाइन बिल्कुल फेसबुक जैसा था. पहली नजर में किसी को शक ही नहीं होता था कि इसके पीछे करोड़ों रुपये की ठगी छिपी है.
अनुभव मित्तल ने लोगों के सामने एक ऐसा बिजनेस मॉडल रखा, जो सुनने में बिल्कुल असली लगता था. उसने दावा किया कि दुनिया की बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां उसकी वेबसाइट पर विज्ञापन देती हैं. लोगों से कहा गया कि उन्हें हर दिन कुछ लिंक दिए जाएंगे. बस उन लिंक पर क्लिक करना है या उन्हें लाइक करना है. हर क्लिक के बदले कंपनी को 6 रुपये मिलते हैं, जिसमें से 5 रुपये यूजर को और 1 रुपया कंपनी अपने पास रखेगी. घर बैठे कमाई का यह सपना हजारों लोगों को सच लगने लगा.
लेकिन इस कमाई की शुरुआत करने से पहले एक शर्त थी. हर व्यक्ति को सदस्य बनना पड़ता था. इसके लिए 5,750 रुपये से लेकर 57,500 रुपये तक का सब्सक्रिप्शन लेना जरूरी था. लोगों ने इसे निवेश नहीं, बल्कि भविष्य की कमाई का टिकट समझा और बिना ज्यादा सवाल किए पैसे जमा करने शुरू कर दिए.
सदस्य बनने के बाद हर सुबह लोगों के डैशबोर्ड पर 125 लिंक दिखाई देते थे. उन्हें सिर्फ उन लिंक पर क्लिक करना होता था. पूरा काम कुछ मिनटों में खत्म हो जाता और अकाउंट में कमाई दिखाई देने लगती. शुरुआत में लोगों को पैसे भी मिलने लगे. जिसने कमाया, उसने अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को जोड़ा. देखते ही देखते यह खबर पूरे देश में फैल गई कि अब बिना नौकरी किए, बिना बिजनेस किए, सिर्फ लिंक क्लिक करके रोज कमाई हो सकती है.
लेकिन असली कहानी कहीं और लिखी जा रही थी.
जब उत्तर प्रदेश STF ने इस मामले की जांच शुरू की, तो एक-एक परत खुलती चली गई. जांच में पता चला कि जिन बड़ी कंपनियों के विज्ञापन दिखाने का दावा किया जा रहा था, उन्होंने कभी कोई विज्ञापन दिया ही नहीं था. लोगों को भेजे जाने वाले सारे लिंक सिर्फ फर्जी सर्वर पर घूम रहे थे. यानी जिन विज्ञापनों पर क्लिक करने के पैसे मिलने की बात कही जा रही थी, वे असल में मौजूद ही नहीं थे.
फिर सवाल उठा कि आखिर लोगों को पैसे कहां से मिल रहे थे.
जवाब था… नए लोगों की जेब से.
यह एक क्लासिक पोंजी स्कीम थी. नए सदस्य जो पैसा जमा कर रहे थे, उसी पैसे से पुराने सदस्यों को रिटर्न दिया जा रहा था. जब तक नए लोग जुड़ते रहे, सिस्टम चलता रहा. लोगों को भरोसा होता गया कि बिजनेस असली है. लेकिन जैसे ही नए लोगों का आना कम हुआ, पूरा ढांचा हिलने लगा.
सबसे हैरानी की बात यह थी कि इस जाल में सिर्फ आम लोग ही नहीं फंसे. पढ़े-लिखे और समझदार माने जाने वाले लोग भी इसमें शामिल हो गए. चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर, इंजीनियर, सरकारी अधिकारी और कई कारोबारी भी इस स्कीम का हिस्सा बन गए. वजह सिर्फ एक थी. शुरुआत में पैसे समय पर मिल रहे थे और यही सबसे बड़ा भरोसा बन गया.
धीरे-धीरे यह नेटवर्क इतना बड़ा हो गया कि करीब 9 लाख लोग इससे जुड़ गए. इतना ही नहीं, करीब 300 से 400 विदेशी निवेशकों ने भी इसमें पैसा लगाया. सोशल ट्रेड अब सिर्फ एक वेबसाइट नहीं रही थी, बल्कि करोड़ों रुपये के लेन-देन वाला विशाल नेटवर्क बन चुकी थी.
फिर एक दिन अचानक सब बदल गया.
लोगों के अकाउंट में पैसे आने बंद हो गए. विदड्रॉल रुक गए. सवाल बढ़ने लगे. शिकायतें पुलिस तक पहुंचने लगीं. इसके बाद उत्तर प्रदेश STF ने कार्रवाई शुरू की. पूर्व IPS अधिकारी डॉ. त्रिवेणी सिंह के नेतृत्व में टीम नोएडा के सेक्टर-63 स्थित ऑफिस पहुंची. छापा पड़ा और वहीं से इस पूरे डिजिटल साम्राज्य की असली तस्वीर सामने आने लगी.
STF ने अनुभव मित्तल, कंपनी के CEO श्रीधर प्रसाद और टेक्निकल हेड महेश दयाल को गिरफ्तार कर लिया. जांच एजेंसियों ने बैंक खातों में जमा 524 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम भी तुरंत सीज कर दी. इसी के साथ भारत के सबसे चर्चित ऑनलाइन पोंजी घोटालों में से एक का पर्दाफाश हुआ.
यह कहानी सिर्फ 3,700 करोड़ रुपये की ठगी की नहीं है. यह उस भरोसे की कहानी है, जिसे डिजिटल दुनिया के नाम पर बेचा गया. लोगों को लगा कि तकनीक उनकी जिंदगी बदल देगी, लेकिन उसी तकनीक का इस्तेमाल उन्हें जाल में फंसाने के लिए किया गया.
साइबर अपराध की दुनिया में हैकर हमेशा कंप्यूटर नहीं हैक करते. कई बार वे इंसान की उम्मीद, भरोसे और जल्दी अमीर बनने के सपने को हैक कर लेते हैं. सोशल ट्रेड पोंजी स्कैम इसकी सबसे बड़ी मिसाल बन गया.
