Friday, July 17, 2026
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₹2,500 के लालच में बना Mule Account, फिर बैंक अकाउंट हुआ फ्रीज

by Anuradha Pandey

सुबह का समय था. दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में लोग अपनी-अपनी परेशानियों में उलझे हुए थे. कोई मरीज के लिए दवा लेने आया था, तो कोई रिपोर्ट का इंतजार कर रहा था. इसी भीड़ में 30 साल का एक युवक भी अपने टीबी से पीड़ित चाचा से मिलने आया था.उसे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि अस्पताल में हुई एक छोटी-सी मुलाकात उसकी जिंदगी को पूरी तरह बदल देगी.
तभी करीब 40 साल का एक शख्स उसके पास आया.

उसने अपना नाम “शिवा” बताया. उसकी बातों में घबराहट थी. उसने कहा, “मेरी मां बहुत बीमार हैं. मुझे तुरंत पैसों की जरूरत है. मेरे अकाउंट से पैसे नहीं निकल रहे. क्या आप मेरी थोड़ी मदद कर सकते हैं?”

युवक को उसकी बात पर भरोसा हो गया. कुछ ही मिनट बाद उसके बैंक खाते में ₹30,000 आ गए. उसने एटीएम से ₹25,000 निकाले. बाकी ₹5,000 उसने अपनी जेब से मिलाए और पूरे ₹30,000 उस अनजान व्यक्ति को दे दिए. उसे लगा कि उसने एक जरूरतमंद इंसान की मदद की है.

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. दो दिन बाद फिर उसी व्यक्ति का फोन आया. इस बार उसने कहा कि गलती से फिर ₹24,000 उसके खाते में आ गए हैं.

पहले तो युवक ने मना किया. लेकिन बाद में वह फिर जीटीबी अस्पताल पहुंचा और पैसे वापस दे दिए. बदले में उसे ₹2,500 मिले. उसे लगा कि थोड़ी-सी मदद करके कुछ पैसे भी मिल गए.

लेकिन उसे नहीं पता था कि उसके बैंक खाते का इस्तेमाल किसी गरीब की मदद के लिए नहीं, बल्कि साइबर अपराध के लिए किया जा रहा था. कुछ हफ्ते बाद अचानक उसका बैंक अकाउंट फ्रीज हो गया.

फिर पुलिस उसके घर पहुंची. उसे हिरासत में लिया गया. उसके खिलाफ दिल्ली से बाहर दर्ज दो साइबर फ्रॉड मामलों की जांच चल रही थी.

दोनों मामलों में रकम वही थी…
₹30,000 और ₹24,000. जिन पैसों को उसने सिर्फ निकालकर किसी और को दे दिया था, वही पैसे साइबर ठगी से जुड़े निकले.

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में युवक ने माना कि उसे इसके बदले ₹2,500 मिले थे.हालांकि उसका कहना था कि उसे नहीं पता था कि यह पैसा साइबर फ्रॉड का है.

कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे छोड़ दिया गया.लेकिन उसकी जिंदगी पहले जैसी नहीं रही.

यह सिर्फ एक युवक की कहानी नहीं है.यह उस नए साइबर नेटवर्क की कहानी है, जो देशभर में तेजी से फैल रहा है.

दिल्ली पुलिस ने अप्रैल में “Cyber Hawk” अभियान शुरू किया.जांच के दौरान पुलिस को एक बेहद चौंकाने वाली बात पता चली.

उत्तर-पूर्वी दिल्ली की एक निजी बैंक शाखा में 96 ऐसे बैंक अकाउंट मिले, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी का पैसा इधर-उधर भेजने के लिए किया जा रहा था.

यानी एक ही बैंक शाखा साइबर अपराधियों के लिए पैसों का बड़ा रास्ता बन गई थी. इसे देखकर पुलिस भी हैरान रह गई.

अब सवाल था…

आखिर ये “म्यूल अकाउंट” होते क्या हैं?

आसान भाषा में समझिए. जब कोई साइबर ठग किसी से पैसे ठगता है, तो वह पैसा सीधे अपने खाते में नहीं मंगाता.

वह पहले किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में भेजता है.यही बैंक खाता म्यूल अकाउंट कहलाता है.
इसके बाद पैसा कई खातों में घूमता है.फिर नकद निकाला जाता है.

फिर हवाला नेटवर्क के जरिए आगे भेजा जाता है.और आखिर में कई मामलों में यह पैसा क्रिप्टोकरेंसी, खासकर USDT, के जरिए विदेशों तक पहुंच जाता है.

पुलिस का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ लोग सिर्फ बैंक खाते जुटाने का काम करते हैं.

ये लोग बेरोजगार युवाओं, दिहाड़ी मजदूरों और आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को निशाना बनाते हैं.

उन्हें कुछ हजार रुपये का लालच दिया जाता है.

कई लोग अपना बैंक अकाउंट, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग और यहां तक कि OTP तक सौंप देते हैं.

कुछ लोगों को यह कहकर फंसाया जाता है कि पैसा ऑनलाइन गेमिंग या निवेश से जुड़ा है.

जबकि असलियत कुछ और होती है.

दिल्ली पुलिस ने जांच में पाया कि इस पूरे नेटवर्क के तार दूसरे राज्यों तक फैले हुए हैं.

जांच के दौरान कुछ डिजिटल लॉग तमिलनाडु तक पहुंचे.

वहां ऐसे बैंक खाते मिले, जो कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड और नकली दस्तावेजों के जरिए खोले गए थे.

पुलिस को कई ऐसे खाते भी मिले, जिनमें गलत पते और फर्जी KYC दस्तावेज इस्तेमाल किए गए थे.

हालांकि अभी तक किसी बैंक कर्मचारी की भूमिका के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं.

लेकिन जांच जारी है.

पुलिस ने संबंधित बैंक को पत्र लिखकर ऑनलाइन अकाउंट खोलने की प्रक्रिया में बदलाव करने और ग्राहकों का फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य करने की सिफारिश की है.

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस व्यक्ति ने खुद को “शिवा” बताया था, वह अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है.

उसका मोबाइल नंबर भी फर्जी दस्तावेजों से लिया गया था. यहां तक कि पुलिस को यह भी नहीं पता कि उसका असली नाम शिवा था या नहीं.

बस एक सुराग मिला. जिस युवक से वह मिला था, उसका कहना है कि उसकी बोली दक्षिण भारतीय जैसी थी.

यानी पुलिस के पास फिलहाल सिर्फ एक आवाज की याद है. यह पूरी घटना एक बड़ा सबक देती है.अगर कोई अनजान व्यक्ति आपसे कहे कि आपके बैंक खाते में पैसे आएंगे और आपको सिर्फ निकालकर उसे देने हैं…

अगर कोई बदले में कमीशन देने की बात करे…अगर कोई आपका बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने के लिए पैसे ऑफर करे…तो समझ लीजिए कि आप अनजाने में साइबर अपराध का हिस्सा बन सकते हैं.

याद रखिए…
बैंक अकाउंट सिर्फ पैसे रखने की जगह नहीं है. यह आपकी कानूनी पहचान भी है.अगर आपके खाते से साइबर ठगी का पैसा गुजरता है, तो जांच एजेंसियों के लिए सबसे पहले आपका नाम सामने आता है.

हो सकता है आपको लगे कि आपने सिर्फ किसी की मदद की थी. लेकिन कानून की नजर में आपका बैंक अकाउंट अपराध की पूरी चेन का हिस्सा बन सकता है.इसलिए कुछ हजार रुपये के लालच में कभी भी अपना बैंक अकाउंट, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग या OTP किसी दूसरे के हाथ में मत दीजिए.

क्योंकि एक छोटी-सी गलती आपको पुलिस स्टेशन से लेकर अदालत तक पहुंचा सकती है.

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