अगर आपको लगता है कि सिर्फ OTP किसी को नहीं बताने से आपका बैंक अकाउंट सुरक्षित है, तो अब सावधान हो जाइए. सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने चेतावनी दी है कि साइबर अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक (Deepfake), बायोमेट्रिक (Biometric) और डिजिटल पहचान का इस्तेमाल करके मिनटों में बैंक फ्रॉड को अंजाम दे सकते हैं.
अब साइबर ठगी पहले जैसी नहीं रही
अगर आज भी आप सोचते हैं कि साइबर ठग सिर्फ OTP मांगकर या फर्जी लिंक भेजकर लोगों को ठगते हैं, तो अब तस्वीर बदल चुकी है.
सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In, CSIRT-Fin और साइबर सिक्योरिटी कंपनी SISA की Digital Threat Report 2025-26 के मुताबिक, अब साइबर अपराधी पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट हो चुके हैं.
वे अब सिर्फ पासवर्ड या OTP चुराने की कोशिश नहीं कर रहे, बल्कि AI की मदद से आपकी डिजिटल पहचान (Digital Identity) को ही निशाना बना रहे हैं.
AI कैसे बन रहा है साइबर ठगों का हथियार?
रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके ऐसे हमले कर रहे हैं, जिन्हें पहचानना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है.
अब ठग…
आपकी आवाज की हूबहू नकल कर सकते हैं.
आपका वीडियो बनाकर डीपफेक (Deepfake) तैयार कर सकते हैं.
बायोमेट्रिक सिस्टम को धोखा देने की कोशिश कर सकते हैं.
बैंकिंग ऐप और डिजिटल पहचान से जुड़ी कमजोरियों का फायदा उठा सकते हैं. अब सिर्फ मोबाइल नंबर या OTP ही नहीं, आपकी पूरी डिजिटल पहचान खतरे में हो सकती है.
बैंक फ्रॉड अब मिनटों में हो सकता है
रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर हमले अब मशीन की रफ्तार से किए जा रहे हैं.पहले जहां ठगों को कई घंटे या कई दिन लगते थे, वहीं अब AI की मदद से कुछ मिनटों में ही हमला शुरू किया जा सकता है.इससे बैंकों और ग्राहकों, दोनों के पास प्रतिक्रिया देने का समय काफी कम रह जाता है.
सबसे ज्यादा निशाने पर कौन?
रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा खतरा BFSI सेक्टर (Banking, Financial Services and Insurance) यानी बैंक, वित्तीय संस्थान और बीमा कंपनियों पर है.
साइबर अपराधी अब…
बैंकिंग ऐप
रियल टाइम पेमेंट सिस्टम
API
पार्टनर ऐप
थर्ड पार्टी प्लेटफॉर्म
को निशाना बना रहे हैं.
Deepfake से भी हो सकता है फ्रॉड-रिपोर्ट में कहा गया है कि Deepfake Fraud तेजी से बढ़ रहा है.अब अपराधी AI की मदद से किसी कंपनी के अधिकारी या किसी परिचित व्यक्ति जैसा वीडियो या आवाज तैयार कर सकते हैं.अगर कोई कर्मचारी बिना पुष्टि किए उस वीडियो या कॉल पर भरोसा कर ले, तो बड़ी रकम का फ्रॉड हो सकता है.
Phishing भी हो गया है ज्यादा खतरनाक
पहले फर्जी ईमेल या मैसेज आसानी से पहचान में आ जाते थे.लेकिन अब AI की मदद से भेजे जाने वाले फिशिंग (Phishing) संदेश इतने असली लगते हैं कि उन्हें पहचानना मुश्किल हो गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक…
Business Email Compromise (BEC)
Credential Theft
Session Hijacking
अब साइबर हमलों के सबसे बड़े रास्ते बन चुके हैं.
CERT-In ने क्या सलाह दी?
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब सिर्फ नए साइबर सिक्योरिटी टूल खरीदना काफी नहीं होगा.बैंकों और वित्तीय संस्थानों को…
मजबूत डिजिटल पहचान सत्यापन (Identity Verification), लगातार व्यवहार की निगरानी (Behaviour Monitoring)
AI आधारित सुरक्षा सिस्टम
बायोमेट्रिक की बेहतर जांच
पूरे डिजिटल इकोसिस्टम की सुरक्षा
पर ज्यादा ध्यान देना होगा.
आम लोग कैसे बच सकते हैं?
CERT-In की रिपोर्ट के आधार पर कुछ आसान सावधानियां अपनाकर जोखिम कम किया जा सकता है.किसी भी वीडियो कॉल या ऑडियो मैसेज पर आंख बंद करके भरोसा न करें, चाहे सामने वाला परिचित ही क्यों न लगे.बैंक से जुड़ी किसी भी जानकारी की पुष्टि हमेशा आधिकारिक ऐप या बैंक से सीधे संपर्क करके करें.किसी भी संदिग्ध लिंक, QR Code या ईमेल पर क्लिक करने से पहले जांच करें.बैंकिंग ऐप और मोबाइल को हमेशा अपडेट रखें.किसी भी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन को दें.
सरकार ने क्यों जारी की यह चेतावनी?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. ऐसे में साइबर सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है.
उन्होंने कहा कि AI जहां नई सुविधाएं लेकर आया है, वहीं उसने साइबर अपराधियों को भी नए हथियार दे दिए हैं. इसलिए देश को ऐसे मजबूत डिजिटल सिस्टम बनाने होंगे, जो साइबर हमलों के दौरान भी सुरक्षित और काम करने की क्षमता बनाए रखें.
आने वाले समय में बैंक फ्रॉड सिर्फ OTP तक सीमित नहीं रहेगा. इसलिए हर डिजिटल यूजर को पहले से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.
