एक 21 साल की लड़की. उसके बैंक अकाउंट में अचानक 3.5 लाख रुपये आते हैं. कुछ दिनों बाद बैंक उसका अकाउंट फ्रीज कर देता है. लड़की सीधे हाई कोर्ट पहुंच जाती है और कहती है कि उसका बैंक अकाउंट फिर से चालू कर दिया जाए. लेकिन सुनवाई के दौरान जो सच सामने आया, उसने सिर्फ उस लड़की की मुश्किलें नहीं बढ़ाईं, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी चेतावनी भी दे दी. केरल हाई कोर्ट ने न सिर्फ उसकी याचिका खारिज कर दी, बल्कि उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का भी आदेश दे दिया. अदालत ने कहा कि साइबर फ्रॉड अब सिर्फ ऑनलाइन ठगी नहीं रह गया है, बल्कि यह संगठित अपराध (Organised Crime) बन चुका है. सबसे चिंता की बात यह है कि इसमें बड़ी संख्या में युवा फंस रहे हैं.
आखिर लड़की ने क्या कहा था?
लड़की का दावा था कि वह शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करती है. उसने अदालत को बताया कि वह बाइनेंस (Binance) ऐप के जरिए यूएसडीटी (USDT) नाम की क्रिप्टोकरेंसी में भी लेन-देन करती है. उसके मुताबिक, उसके बैंक अकाउंट में आए 3.5 लाख रुपये एक वैध ट्रांजैक्शन का हिस्सा थे. लेकिन जब अदालत ने पूछा कि यह पैसा आखिर किसने भेजा था और उसका असली स्रोत क्या था, तो वह इसका कोई पक्का सबूत नहीं दे सकी. यहीं से पूरा मामला बदल गया.
बैंक ने क्या बताया?
केरल ग्रामीण बैंक ने अदालत को बताया कि मदुरै साइबर पुलिस ने इस खाते में आए 3.5 लाख रुपये को संदिग्ध माना था. पुलिस के कहने पर ही बैंक ने अकाउंट फ्रीज किया था.जांच एजेंसियों को शक था कि यह पैसा किसी साइबर ठगी से जुड़ा हो सकता है.
आखिर ‘म्यूल अकाउंट’ क्या होता है?
अब सबसे जरूरी बात समझिए. मान लीजिए किसी साइबर ठग ने किसी व्यक्ति से 10 लाख रुपये ठग लिए. अगर वह पूरा पैसा सीधे अपने बैंक अकाउंट में रख ले, तो पुलिस उसे आसानी से पकड़ सकती है. इसलिए ठग एक चाल चलता है. वह चोरी की रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट देता है. फिर यह पैसा अलग-अलग लोगों के बैंक खातों में भेजता है. वहां से यह रकम दूसरे खातों में चली जाती है. कई बार यह सिलसिला 10 से 20 खातों तक चलता है. ऐसे बैंक खातों को ‘म्यूल अकाउंट (Mule Account)’ कहा जाता है. सीधी भाषा में कहें तो यह ऐसा बैंक अकाउंट होता है, जिसका इस्तेमाल ठगी के पैसे को इधर-उधर घुमाने के लिए किया जाता है.
लोग अपना अकाउंट क्यों देते हैं?
यहीं सबसे बड़ा खेल होता है. कुछ लोग सोशल मीडिया, टेलीग्राम या व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजते हैं. वे कहते हैं… बस अपना बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने दो. हर महीने 10 हजार, 20 हजार या 30 हजार रुपये मिल जाएंगे. कई युवा इसे आसान कमाई समझ लेते हैं. उन्हें लगता है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया. सिर्फ अपना अकाउंट ही तो दिया है. लेकिन कानून ऐसा नहीं मानता. अगर आपके अकाउंट से ठगी का पैसा गुजरता है, तो जांच सबसे पहले आप तक पहुंचेगी.
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
केरल हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि साइबर फ्रॉड अब बहुत तेजी से बढ़ रहा है. तकनीक ने लोगों की जिंदगी आसान जरूर बनाई है, लेकिन अपराधियों का काम भी आसान कर दिया है. आज ठग मोबाइल, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई, क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल करके लाखों लोगों को निशाना बना रहे हैं. इसके बाद चोरी का पैसा ऐसे बैंक खातों में भेजा जाता है, जिनका इस्तेमाल सिर्फ पैसे घुमाने के लिए होता है. अदालत ने कहा कि कई युवा बिना पूरी बात समझे ऐसे खातों का हिस्सा बन रहे हैं.
अदालत ने युवाओं को लेकर चिंता क्यों जताई?
कोर्ट ने कहा कि आज 18 से 25 साल की उम्र के कई युवा जल्दी पैसे कमाने के चक्कर में अपना बैंक अकाउंट दूसरों को इस्तेमाल करने दे रहे हैं. उन्हें लगता है कि इससे कोई नुकसान नहीं होगा. लेकिन असल में वे खुद साइबर गैंग का हिस्सा बन जाते हैं. कई बार उन्हें यह भी पता नहीं होता कि उनके अकाउंट से गुजर रहा पैसा किसी ठगी का है.
वकीलों को लेकर भी कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
हाई कोर्ट ने एक और गंभीर बात कही. अदालत ने बताया कि हाल के दिनों में ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिनमें बैंक अकाउंट फ्रीज होने के बाद उसे खुलवाने के लिए याचिकाएं दायर की जाती हैं. कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में लगभग एक जैसी भाषा वाली याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं. अदालत ने यह भी चिंता जताई कि कुछ युवा वकील ऐसे मामलों में बड़ी संख्या में पेश हो रहे हैं. हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सभी युवा वकील ऐसे नहीं हैं. कई वकील वास्तव में निर्दोष लोगों की मदद भी करते हैं. लेकिन अगर कोई जानबूझकर गलत लोगों की मदद करता है या फर्जी दस्तावेज दाखिल करता है, तो यह गंभीर मामला है.
याचिका वापस लेने की कोशिश भी नहीं चली
जब अदालत को लगा कि युवती अपनी बात साबित नहीं कर पा रही है, तब उसके वकील ने कहा कि वह याचिका वापस लेना चाहती है. उन्होंने कहा कि अब वह बैंक अकाउंट चलाना भी नहीं चाहती. लेकिन कोर्ट ने यह मांग मानने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि जब लोगों को लगता है कि उनका मामला कमजोर पड़ रहा है, तो वे याचिका वापस लेकर जांच से बचने की कोशिश करते हैं. ऐसा नहीं होने दिया जा सकता.
फिर कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
केरल हाई कोर्ट ने युवती की याचिका खारिज कर दी. इसके साथ ही अदालत ने तनूर पुलिस स्टेशन को निर्देश दिया कि युवती के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 111, यानी संगठित अपराध के तहत एफआईआर दर्ज की जाए और पूरे मामले की जांच की जाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच में यह पता लगाया जाए कि क्या इस मामले में और भी लोग शामिल हैं.
आम आदमी को क्या सीख लेनी चाहिए?
आजकल साइबर ठग सिर्फ ओटीपी या लिंक भेजकर ठगी नहीं कर रहे हैं.
वे अब लोगों के बैंक अकाउंट का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.
अगर कोई व्यक्ति आपको कहे कि…
अपना बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने दो.
कुछ पैसे आएंगे और आगे चले जाएंगे.
बदले में कमीशन मिलेगा.
कोई जोखिम नहीं है.
…तो तुरंत मना कर दीजिए.
याद रखिए, बैंक अकाउंट आपका है, इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी आपकी है. अगर उस अकाउंट से ठगी का पैसा निकला, तो पुलिस सबसे पहले आपसे सवाल पूछेगी.
